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Sant Kabir Nagar News: चकबंदी हुई नहीं, 10 लाख का करा दिया विकास कार्य

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संवाद न्यूज एजेंसी
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धनघटा। विकास खंड हैसर बाजार की ग्राम पंचायत डेबरी में चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण नहीं हुई। धारा-52 का अनुपालन भी नहीं हुआ कि इसके पहले विभिन्न परियोजनाओं पर ग्राम पंचायत की ओर से मनरेगा के तहत 10 लाख से अधिक रुपये के विकास कार्य करा दिए गए।
अब जब चकबंदी विभाग अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई कर रहा है तो किसान भी नवनिर्मित चकरोड ढहा रहे हैं। इससे सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा। डेबरी गांव में वर्ष-2017 में चकबंदी शुरू हुई। जो अभी तक चल रही है। चकरोड के निर्धारण में भारी अनियमितता बरते जाने से नाराज किसानों ने हंगामा कर दिया। यह बात जिलाधिकारी के संज्ञान में आई तो उन्होंने चकबंदी अधिकारियों को तलब करके सही ढंग से कार्रवाई का निर्देश दिया। इतना ही नहीं उसके बाद चकबंदी विभाग के एसीओ के विरुद्ध कार्रवाई करके अब तक किए गए चक के आवंटन को निरस्त कर दिया गया। अब नए सिरे चकबंदी होगी।
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चकबंदी विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चकबंदी प्रक्रिया धारा-52 का मतलब होता है कि गांव को चकबंदी प्रक्रिया से मुक्त कर दिया गया हो और सभी अभिलेख राजस्व विभाग को दे दिए जाते हैं। उसके बाद ही गांव में किसी तरह का निर्माण कार्य कराया जा सकता है। चाहे वह चकरोड हो, चाहे वह मकान, लेकिन धारा-52 का अनुपालन हुए बगैर ही ग्राम पंचायत में मनरेगा के तहत चकरोडों का निर्माण करा डाला। इस पर 10 लाख से अधिक रुपये खर्च हुए हैं।
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ग्रामीण जितेंद्र शर्मा, कृष्णानंद, विपुल कुमार, हरिश्चंद्र आदि का कहना है कि चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण होने के पहले ही चकरोडों का निर्माण कराना नियम के विरुद्ध है। चकबंदी के दौरान चिह्नित किए गए चकरोड अब पट जाने के बाद ढहाए जा रहे हैं। इसमें सरकारी धन का बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा है।
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