संतकबीरनगर। खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के मदरसा कुल्लियातुल बनातिर रजविया के ध्वस्तीकरण मामले में बस्ती मंडलायुक्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चार सप्ताह में फैसला सुनाने का आदेश दिया है। प्रबंधन समिति ने मंडलायुक्त के यहां डीएम कोर्ट के आदेश के खिलाफ निगरानी याचिका दाखिल की थी। वहां सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया गया है। वहीं मंडलायुक्त कोर्ट से आदेश आने से पहले ही प्रबंधतंत्र ने मामले में हाईकोर्ट की शरण ले ली। इस पर छह अप्रैल को डबल बेंच की अदालत ने आदेश दिया है।
न्यायालय ने आदेश में कहा गया है कि मामले में पुनरीक्षण (रिवीजन) प्राधिकारी को आदेश मिलने की तिथि से चार सप्ताह के भीतर अंतरिम राहत अर्जी पर फैसला करें। तब तक विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखी जाएगी। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह की खंडपीठ ने प्रबंधन समिति, कुल्लियातुल बनातिर रज़विया एजुकेशनल सोसायटी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका में खलीलाबाद शहर के मोतीनगर स्थित मदरसा निर्माण और स्वामित्व से जुड़े विवाद में जिला प्रशासन के आदेश को चुनौती दी गई थी। उनका कहना था कि अगर प्रशासन द्वारा ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) की कार्रवाई की गई तो उन्हें अपूरणीय नुकसान होगा। इस पर हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी करने से इन्कार करते हुए कहा कि चूंकि मामला पहले से ही संबंधित प्राधिकारी के पास लंबित है, इसलिए वहीं इस पर फैसला होगा।
पुनरीक्षण प्राधिकारी चार सप्ताह में अंतरिम राहत पर निर्णय लें, तब तक विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनी रहे। याचिकाकर्ता फिलहाल जमीन पर कोई नया निर्माण या विकास कार्य नहीं करेंगे। मदरसे की जमीन व ध्वस्तीकरण मामले में अब आगे का फैसला पुनरीक्षण प्राधिकारी के आदेश पर निर्भर करेगा।
पेंशन व बैंक खातों से रोक हटाने के लिए भी दाखिल है याचिका
मौलाना शमशुल हुदा खान के आजमगढ़ से जारी पेंशन पर अक्तूबर 2025 में रोक लगी है। स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद से मौलाना को पेंशन दी जा रही थी। एटीएस की जांच के बाद मामला खुलने और मदरसे की मान्यता निलंबित होने के बाद पेंशन पर रोक लगा दी गई। वहीं फेमा के तहत खलीलाबाद कोतवाली में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद जांच अधिकारी ने मौलाना व उसके परिजनों से संबंधित 18 विभिन्न बैंक खातों में जमा धनराशि को फ्रीज करा दिया।
इस मामले में भी मौलाना के परिजनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसमें अभी तक कोई फैसला नहीं आया है।