कबीर मगहर महोत्सव के चौथे दिन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन व कुलहिंद मुशायरे का आयोजन किया गया। अध्यक्षता अंतरराष्ट्रीय शायर नदीम फार्रुख व अध्यक्षता मशहूर कवि जमना प्रसाद उपाध्याय ने की। प्रसिद्ध हास्य कवि गजेंद्र प्रियांशु ने ‘इतने निर्मोही कैसे सजन हो गए किसी की बाहों में जाकर मगन हो गए’ सुनाकर श्रोताओं को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।
संचालन का करते हुए नदीम फार्रुख ने सरस्वती वंदना के लिए कवि पवन सबा को आवाज दी। जिन्होंने ‘शरण में ले...’ सुनाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। इसके बाद हम्द पाक के लिए शायर शबीना अदीब को आवाज दी। उन्होंने, ‘जन्नत का दर ढूंढ़ती है, मुहम्मद को मेरी नजर ढूंढ़ती है’ सुनाया। उन्होंने देश प्रेम गीत ये वतन मेरा वतन ये वतन, ये मोहब्बत की जमीं है ये शहीदों का चमन सुनाकर देश प्रेम का जज्बा पैदा कर दिया।
शायर शबीना अदीब ‘हाल क्या दिल का है इजहार से रौशन होगा यानी किरदार तो किरदार से रोशन होगा, रात दिन आप चिरागों को जलाते क्यों हैं, घर चिरागों से नहीं प्यार से रौशन होगा’। खमोश लब हैं झुकी हैं पलकें दिलों में उल्फत नई नई है, अभी तकल्लुफ है गुफ्तगू में अभी मोहब्बत नई-नई है। ‘तुम जहां हो मैं वहीं हूं, तुम समझते क्यों नहीं, मैं अकेले कुछ नहीं हूं तुम समझते क्यों नहीं’ सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इसी तरह कवि राजेश रेड्डी, डाॅक्टर विष्णु सक्सेना, डाॅक्टर सर्वेश अस्थाना, गजेंद्र प्रियांशु, जमुना प्रसाद उपाध्याय, साक्षी तिवारी, तारा चंद तनहा और शायरों में शकील आजमी, डॉक्टर इकबाल अशहर, डाॅक्टर कलीम कैसर, शायरा नुसरत अतीक आदि कवि ने अपनी रचनाएं पढ़ी।
इस दौरान महंत विचारदास, डीएम महेंद्र सिंह तंवर, एसपी सत्यजीत गुप्त, एडीएम जय प्रकाश, एएसपी शशिशेखर सिंह, एसडीएम सदर शैलेश दूबे, चेयरमैन अनवरी बेगम, चेयरमैन प्रतिनिधि नूरुज्जमा अंसारी समेत अन्य माैजूद रहे।