संतकबीरनगर। कोलेस्ट्रॉल को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच लोग बिना डॉक्टर की सलाह के ही दवाएं लेना शुरू कर रहे हैं। इसका दुष्परिणाम हार्मोन के संतुलन पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञ उन्हें दवा के साथ जरूरी सलाह भी दे रहे हैं।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रमाशंकर ने बताया कि कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवाओं (स्टेटिन्स) के लंबे समय तक अत्यधिक सेवन से शरीर में विटामिन डी की कमी हो रही है। इससे हार्मोन संतुलन बिगड़ रहा है, जिसके कारण अन्य बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि स्टेटिन्स दवा कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए प्रभावी हैं, लेकिन इनका बिना चिकित्सकीय निगरानी के इस्तेमाल खतरनाक साबित हो रहा है। इससे कोलेस्ट्रॉल के साथ साथ विटामिन डी का स्तर भी प्रभावित होता है।
विटामिन डी की कमी से मांसपेशियों में दर्द, हड्डियां कमजोर होना और हार्मोन असंतुलन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। ओपीडी में प्रतिदिन 100 से 110 मरीज आ रहे हैं। इनमें 20 से 25 मरीज इसी समस्या से पीड़ित मिल रहे हैं। विशेषज्ञ का कहना है कि स्टेटिन्स का सेवन डॉक्टरी सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। आवश्यक जांच के बाद ही दवा शुरू की जाती है और विटामिन डी की कमी होने पर सप्लीमेंट दिए जाते हैं।
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विटामिन-डी की कमी से होने वाली परेशानी
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. शिव ओंभू ने बताया कि विटामिन डी की कमी के कारण हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन और अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। इससे मरीजों को चलने-फिरने में भी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका जीवनशैली में सुधार करना है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त मात्रा में धूप का सेवन अत्यंत लाभकारी है। दवाएं केवल तभी लेनी चाहिए जब डॉक्टर जांच के बाद उनकी सलाह दें।
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विशेषज्ञ के सुझाव
- कम से कम एक घंटे सुबह की धूप लें।
- कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
- बिना डॉक्टरी सलाह के स्टेटिन्स न लें।
- संतुलित आहार और फल खाएं।
- कोई भी समस्या आने पर डॉक्टर को दिखाएं।