जिला अस्पताल में बच्चे की जांच करते चिकित्सक-संवाद
संतकबीरनगर। ठंड बच्चों के लिए सबसे ज्यादा घातक है। ठंडक में बच्चे खांसी, जुकाम की चपेट में अधिक आ रहे हैं। प्रतिदिन जिला अस्पताल और सीएचसी में 200 से अधिक बच्चे आ रहे है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चों के कान, नाक को ढककर उन्हें खांसी, जुकाम से बचाया जा सकता है।
सोमवार की सुबह ओपीडी शुरू होने के साथ ही पर्चा काउंटरों पर मरीजों की लंबी कतार लग गईं। बाल रोग विशेषज्ञ कक्ष के बाहर बच्चों को दिखाने के लिए कतार लगी रही। डाक्टरों ने करीब 100 बच्चों का उपचार किया। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वीपी पांडेय ने बताया कि इस समय चल रही ठंडी हवाओं के संपर्क में आते ही बच्चे खांसी और जुकाम की चपेट में आ रहे हैं। उन्हें बुखार भी आ रहा है। बताया कि खांसी आते ही इंतजार न करें तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
देरी होने पर बच्चों के फेफड़ों पर प्रभाव पड़ता है और स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्हाेंने करीब 60 बच्चों को ओपीडी में परामर्श दिया। अधिकतर मौसम जनित बीमारियों से ग्रसित रहे। बताया कि बच्चों में इन दिनों डायरिया, निमोनिया के साथ ही सर्दी-जुकाम की शिकायतें मिल रही हैं। बताया कि ठंड के दौरान धूप निकलने पर मां बच्चे की मालिश करती हैं। यह गलत है क्योंकि ठंड में धूप लेने से शरीर को राहत तो मिलती है पर छोटे बच्चों की मालिश करना घातक साबित हो रहा है। मालिश के दौरान बच्चों को धूप के साथ ठंडी हवा भी लगती है, जो उन्हें नुकसान पहुंचाती है।