जर्जर अवस्था में मुखलिसपुर में स्थित बस स्टैंड
धनघटा। अव्यवस्था के कारण मुखलिसपुर बस स्टेशन का हाल बदहाल है। रोडवेज बस स्टेशन के लिए बना भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। अगल-बगल झाड़ियां उग गई हैं। बस स्टेशन की व्यवस्था और रख-रखाव के लिए परिचालक को पार्ट टाइम जिम्मेदारी सौंप अधिकारी खानापूर्ति करने में लगे हैं।
वर्ष 1962 में मुखलिसपुर बस स्टेशन की स्थापना के बाद क्षेत्र के लोगों को उम्मीद थी कि उन्हें परिवहन निगम की बसों से सुविधा मिलने लगेगी। निर्माण के कुछ ही समय बाद बस अड्डे का संचालन बंद हो गया। रख-रखाव नहीं होने के कारण बस स्टेशन का भवन पूरी तरह जर्जर हो गया। हालत यह है कि बस अड्डे की छत का प्लास्टर टूटकर गिर रहा है। बाउंड्रीवाल की हालत भी खस्ता हो चुकी है।
तीन वर्ष पूर्व परिवहन निगम ने चहारदीवारी की मरम्मत के साथ ही यात्री सुविधा केंद्र बनवाया था। बस स्टेशन परिसर में सुलभ शौचालय का भी निर्माण कराया गया। सफाई के लिए एक कर्मचारी रखा गया। करीब तीन वर्ष पूर्व मुखलिसपुर रोडवेज बस स्टेशन का संचालन फिर से शुरू हुआ। यहां से एक मात्र बस मुखलिसपुर से गोरखपुर के रास्ते निचलौल तक जाती है, लेकिन यह भी बस अड्डे पर नहीं जाती है। डग्गामार वाहनों का लेना पड़ रहा सहारा : मुखलिसपुर बस स्टेशन से बसों का संचालन नहीं होने के कारण लोगों को डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्राम प्रधान मनोज अग्रहरि, सुरेंद्र यादव, श्रवण पाल आदि ने बताया कि बस स्टैंड से पर्याप्त बसों का संचालन नहीं हो रहा है।