संतकबीरनगर। फसल अवशेष जलाने से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए पराली प्रबंधन के संबंध में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। फसल अवशेष जलाए जाने से मिट्टी, जलवायु एवं मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है और मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है। पर्यावरण भी दूषित होता है। ऐसे में फसल अवशेष जलाने पर 15 हजार का जुर्माना हो सकता है। इसकी निगरानी सेटेलाइट से हो रही है।
उप कृषि निदेशक डॉ. राकेश सिंह ने बताया कि एक अप्रैल से 19 अप्रैल तक जनपद में कुल 723 फसल अवशेष जलाने की सूचना प्राप्त हुई है, जिसका स्थलीय निरीक्षण कृषि एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा किया जा रहा है। ऐसे कृषक जिन्होंने डंठल को खेतों में जलाया है, उनसे नियमानुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली की जाने तैयारी की जा रही है।
क्षेत्रीय कर्मचारियों द्वारा इसका सर्वेक्षण किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील किया कि खेत में फसल अवशेष कदापि न जलाएं। फसल अवशेष जलाए जाने की घटना पाए जाने पर राजस्व विभाग द्वारा आर्थिक दंड लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मृदा की उर्वरता बनाए रखने एवं पर्यावरण में प्रदूषण को कम करने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन अति आवश्यक है। फसल अवशेष को पशुपालन विभाग एवं ग्राम पंचायत विभाग के सहयोग से गोशाला में दान करने के लिए प्रेरित किया जाए।