बीएसए ने कई बार हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना की थी
संतकबीरनगर। हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना करना बीएसए पर भारी गुजरा। सोमवार को वह कानून के शिकंजे में आ ही गए। हालांकि, उन पर हुई कार्रवाई पर उनके महकमे और प्रशासन ने पर्दा डालने की कोशिश की। अधिकारी यही कहते रहे कि बीएसए खुद कोर्ट गए हैं। कर्मी कुछ बोलने से बचते रहे।
बीएसए कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, सरदार पटेल अवर माध्यमिक विद्यालय कालीजगदीशपुर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की नियुक्ति होनी थी। उस पर विद्यालय के प्रबंधक ने बीएसए से नियुक्ति कराए जाने की बात की थी। बीएसए ने कोई कार्यवाही नहीं की। विद्यालय के प्रबंधक बुद्घिराम चौधरी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 11 अक्तूबर 2022 को बीएसए को आदेश दिया था कि दो सप्ताह में चतुर्थ श्रेणी कर्मी की नियुक्ति के लिए विज्ञापन प्रकाशित कर प्रक्रिया पूरी कराएं।
उसके बाद भी बीएसए ने प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई। इस पर प्रबंधतंत्र ने बीएसए के विरुद्ध हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। अवमानना याचिका के नोटिस पर भी बीएसए, हाईकोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। उसके बाद हाईकोर्ट ने छह अप्रैल को बीएसए के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से गैर जमानती वारंट का तामिला कराने के लिए कहा था। उसके बाद से पुलिस ने उन्हें सोमवार को कोर्ट में पेश किया।
तैनाती के बाद से ही चर्चा में हैं बीएसए
बीएसए अतुल कुमार तिवारी जिले में जुलाई 2022 में तैनाती के बाद से ही चर्चा में आ गए। तैनाती के बाद ही उन्होंने जिला समन्वयक एमडीएम को बर्खास्त कर दिया। इस मामले में हाईकोर्ट ने डीसी एमडीएम की बर्खास्तगी आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके साथ ही बीएसए कार्यालय में पत्रावलियों को लटकाने की शिकायत भी डीएम और शासन स्तर तक पहुंची थी। मंडलायुक्त ने भी बीएसए कार्यालय की गड़बड़ी पकड़ी थी। तब तत्कालीन डीएम प्रेमरंजन सिंह ने बीएसए कार्यालय में छापा मारा था और पत्रावली अपने साथ लेते गए थे।