- केस दर्ज करने से पहले धारा लगाने के लिए करनी पड़ती है मशक्कत
- आईपीसी में प्रार्थनापत्र देखते तय हो जाता था केस की धारा
- एक से 31 जुलाई तक सभी थानों में 305 केस पंजीकृत
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। नए कानून लागू होने के बाद केस दर्ज होने की रफ्तार धीमी हो गई है। नए कानून लागू होने से पूर्व पुलिस प्रार्थनापत्र देखते ही केस की धाराएं तय कर देती थी, लेकिन अब बीएनएस के तहत केस दर्ज करने से पहले उससे संबंधित धाराएं खोजने में घंटों मशक्कत करनी पड़ रही है।
थाना पर आने वाले फरियादियों को अभी बीएनएस की धारा समझ में नहीं आ रही है। वह आईपीसी की जिन धाराओं को समझते हैं उसी धारा में केस दर्ज करने की मांग करते हैं। तीन नए कानून लागू होने के बाद हर थाना का नजारा बदला हुआ देखने को मिल रहा है। अभी तक पुलिस शिकायत पत्र देखते ही केस की धारा तय कर लेती थी। इससे इतर अब हालात बदल गए हैं।
हर केस दर्ज करने से पहले उससे संबंधित धारा खोजने में समय लगता है। थाना के मुंशी बीएनएस की धारा रट रहे हैं। नई धारा को समझने के लिए आईपीसी का भी सहारा लिया जा रहा है। बीएनएस के तहत दर्ज केस में वीडियो की भी अनिवार्यता है, जो पुलिस के लिए सिरदर्द भी है। वहीं धारा की समक्ष न होने के वजह से पीड़ितों को भी अधिवक्ताओं का सहारा लेना पड़ रहा है।
बीएनएस के तहत एक माह में 251 केस दर्ज
पुलिस आंकड़ों के मुताबिक बीएनएस के तहत जुलाई माह में 251 केस पंजीकृत किए गए हैं। वहीं एक से लेकर 31 जुलाई तक जनपद के सभी थाना में 305 केस रजिस्टर्ड हुए हैं। इनमें से 54 केस पुराने आईपीसी की धारा में पंजीकृत हुए हैं, जबकि इससे पूर्व एक से 30 जून के मध्य आईपीसी में जिले के सभी थाना में 326 केस पंजीकृत किए गए थे।
जुलाई माह में कुल 305 केस जनपद के सभी थाना में दर्ज हुआ है। इनमें से 251 केस बीएनएस व 54 केस पुराने आईपीसी में पंजीकृत किया गया है।
- सत्यजीत गुप्ता, एसपी