साइबेरियाई पक्षियों के लिए इस वर्ष यहां का मौसम बेहद मुफीद साबित हो रहा है। बखिरा झील में हजारों की संख्या में लालसर, टिकिया, कामनटील, नीलसर, पोचर्ड, पुचास प्रजाति की पक्षियों की आमद होने से समूचा परिक्षेत्र पर्यटकों को लुभा रहा है।
शीतकाल का आरम्भ होते ही बखिरा झील समेत आसपास के जलाशयों में भी प्रवासी पक्षियों की आमद बढ़ जाती है।
इस वर्ष अनुकूल मौसम होने से झील के 29 वर्ग किलो मीटर के दायरे में फैले हुए पक्षी विहार में प्रवासी पक्षियों की दर्जनों प्रजातियां मौजूद हैं।
इस मनमोहक दृष्य को देखने के लिए पर्यटकों के साथ ही विभिन्न स्थानों से अधिकारी, नेता व पर्यावरण प्रेमी आते हैं। जनपद व मंडलाधिकारियों का आवागमन भी होता है। बरबस ही आसमान में उड़ता पक्षियों का झुंड लोगों का ध्यान आकर्षित करता है।
वर्ष 1990 में पक्षी विहार घोषित होने के बाद से ही इस झील में पक्षियों का शिकार प्रतिबंधित कर दिया गया था।
इस प्रतिबंधित क्षेत्र की देखभाल के लिए कार्यालय, म्यूजियम, नाविक आवास, रेंजर आवास समेत कार्यालय स्थापित है। पर्यटकों को झील का दृष्यावलोकन के लिए वाच टावर व जेटी का निर्माण कराया गया है।
झील में भ्रमण के लिए फाइबर की नावें भी मौजूद हैं। ठंड की शुरूआत होते ही साइबेरिया, रूस, चीन, तिब्ब्त, यूरोप समेत कई देशों से अमूमन 5000 किलो मीटर की दूरी तय करके आने वाले प्रवासी पक्षी झील में अपना चार महीने का प्रवास काल पूरा करते है। अगर मौसम मुफीद होता है तो इनका रहने का समय बढ़ जाता है।