मोलनापुर। टूमपार चौराहे पर चल रहे रुद्र महायज्ञ के दूसरे दिन कथावाचक स्वामी सखी ने रामचरितमानस की महत्ता का बखान किया। उन्होंने कहा कि भगवान को पाने के लिए मन और चरित्र को भगवान के चरणों में समर्पित करना होगा। भागवत कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। कथा सुनने से मन को शांति मिलती है।
भागवत भक्ति और कथा का मर्म समझाते हुए कहा कि भागवत कथा समाज में प्रेम का संदेश देता है। समाजिक सद्भाव और शांति तथा आपसी भाईचारा के लिए भागवत कथा जरूरी है। कथा श्रवण से कष्ट दूर होते हैं। ईश्वर को पाने के लिए सिर्फ मंदिर में भटकने की जरूरत नहीं है, वह सभी जगह विराजमान हैं। भागवत कथा श्रवण से सत्कर्म करने की प्रेरणा मिलती है।
इसीलिए कर्म को सबसे बड़े धर्म की संज्ञा दी गई है। भगवान शंकर ने कर्म फलदायक को संरक्षित कर रखा। इस जीवन में अच्छे कर्म कर प्राणी हमेशा के लिए जन्म-मृत्यु से मुक्ति पाकर परमधाम को प्राप्त कर सकता है। इस अवसर पर दयाराम चौधरी, रामचंद्र सिंह, शैलेश सिंह, अर्जुन यादव, सूर्य प्रकाश पाण्डेय, विशन चौबे मोछू आदि मौजूद रहे।