- छत्तीसगढ़ से आ रही दाल में हो रही मिलावट, पहचान पाना मुश्किल
- जिले में रोजाना करीब 20 क्विंटल दाल की खपत
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। खाने में अरहर दाल का खूब इस्तेमाल होता है। लोग दाल में तड़का लगाकर खाना खूब पसंद करते हैं। लेकिन जो दाल आप खा रहे हैं कहीं इसमें मिलावट तो नहीं। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से आ रही दाल में खेसारी की मिलावट करके बेचा जा रहा है। खेसारी मिलावट की दाल लोगाें की सेहत पर असर डाल रहा है। इसे लगातार खाने से आंख की समस्या और लकवा मारने का खतरा रहता है। खाद्य विभाग की टीम ने दो माह में दाल के चार नमूने लिए जो जांच के लिए लैब भेजे गए है।
शहर के प्रमुख व्यापारियों की माने तो मिल से जो दाल निकलती है उसका आकार एक बराबर होता है। अगर उसमें खेसारी की मिलावट कर दी जाए तो फर्क पता चल जाएगा। व्यापारियों का कहना है कि अगर आप दाल खरीद रहे हैं तो उसे बारीकी से देख लें। जो लोग दाल मंगाते हैं तो उसे अच्छी तरह से जांच परख लेते हैं।
शहर में कुछ जगहों पर पटरी पर तरह-तरह के रंग-बिरंगे दाल बेचे जा रहे हैं, जिसमें खेसारी की मात्रा अधिक होती है। व्यापारियोंं का कहना है कि जो दाल आ रही है वह गोरखपुर मंडी से ही मंगाया जाता है। मंडी में छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से दाल आती है। वहां भी सतर्कता बरती जा रही है, पर मिलावटखोर दाल में खेसारी मिलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
एक क्विंटल में दो हजार का मुनाफा
संतकबीरनगर। एक क्विंटल दाल में खेसारी मिलाने से करीब दो हजार का मुनाफा मिलावटखोर कमाते हैं और शुद्ध दाल की कीमत पर बेच देते हैं। जिले में रोजाना करीब 20 क्विंटल दाल की खपत है। यह दाल अन्य दाल से करीब 15 रुपये सस्ती होती है और शहर के किसी भी फुटपाथ पर मिल जाएगी।
दाल में खेसारी की मिलावट से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ता है। अगर नियमित इसे खा रहे हैं तो पेट की समस्या के साथ ही लकवा की भी समस्या आ सकती है। ऐसे में दाल खरीदते समय सतर्कता जरूर बरतें। खेसारी मिलावट दाल खाने से आंख में दिक्कत और गैस की समस्या बनी रहती है। परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
- डॉ. आनंद प्रकाश मिश्र, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल
बोले जिम्मेदार
मिलावटी दाल को लेकर सतर्कता बरती जाती है। ज्यादातर दाल गोरखपुर मंडी से आती है। वहां पर भी छत्तीसगढ़ से दाल आती है। गोरखपुर के व्यापारी सतर्कता बरत रहे हैं। यह कहा गया है कि दाल खरीदते समय उसकी गुणवत्ता देख लें, अगर मिलावटी है तो उसका भुगतान न करें। वैसे अभी तक इस मामले में किसी व्यापारी की शिकायत नहीं आई है।
- सर्वदानंद पांडेय, अध्यक्ष, पूर्वांचल उद्योग व्यापार मंडल
दो माह में दाल के चार नमूने लिए गए थे। इसमे से दो नमूने तो सही मिले पर दो नमूने के रिपोर्ट अभी तक नहीं आए है, इसमे कुछ गडबडी है, नमूना की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। वैसे टीम लगातार दाम व अन्य खाद्य सामग्री की जांच करती रहती है।
- जेपी तिवारी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी