विजिलेंस टीम द्वारा घूस लेते हुए पकड़े गए निलंबित बीएसए गजराज यादव को बुधवार को जेल भेज दिया गया। इस मामले की विवेचना विजिलेंस इंस्पेक्टर राजहंस शुक्ल को मिली है। गौरतलब है कि पूर्व में भी जिले से कई अधिकारी और कर्मचारी घूसखोरी में पकड़े जा चुके हैं।
सांथा ब्लॉक क्षेत्र के केचुआखोर प्राथमिक विद्यालय पर तैनात निलंबित शिक्षक नवीन त्रिपाठी ने विजिलेंस के एसपी से बीएसए की शिकायत की थी। इसी क्रम में टीम ने मंगलवार शाम को बीएसए गजराज यादव को उनके आवास से 20,000 रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। इस मामले में बीएसए पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ है। विजिलेंस इंस्पेक्टर धराचार्य पांडेय ने बताया कि बीएसए मामले की विवेचना इंसपेक्टर हंसराज शुक्ल को मिली है। गोरखपुर परिक्षेत्र में वर्ष 2016 में रिश्वत के कुल 18 मामलों में कार्रवाई हुई थी। जबकि इस साल अभी तक दो कार्रवाई हुई हैं। जिसमें मधुबन में एक बिजली विभाग का जूूनियर इंजीनियर और संतकबीरनगर में बीएसए को घूूसखोरी के आरोप में पकड़ा गया।
इसके पहले धनघटा में एक प्रभारी काननूगो, महुली में एक स्कूल के प्रबंधक को और धनघटा क्षेत्र के ही एक मदरसे के प्रंबधक के भतीजे को और जिला श्रम प्रवर्तन अधिकारी को रिश्वत लेते पकड़ा गया था। इसके अलावा कोतवाली में तैनात एक दरोगा को भी पूर्व में विजलेंस टीम ने ही पकड़ा था। जबकि एंटी करप्सन टीम ने पौली चौकी के तत्कालीन इंचार्ज विनोद कुमार को घूस लेते पकड़ा था और आरोपी दरोगा थाने से ही भाग गया था।
इसके अलावा बखिरा से डाक विभाग के एक पूर्व अधिकारी को भी टीम ने पकड़ कर जेल भेजा था। सांथा ब्लॉक में तैनात रहा एक कर्मी को भी घूसखोरी में पकड़ कर जेल भेजा गया था। इतना ही नहीं पीएनबी धनघटा शाखा के एक पूर्व शाखा प्रबंधक को सीबीआई टीम ने घूसखोरी में पकड़ कर जेल भेजा था। रिश्वत मामले में बीएसए के जेल जाने को लेकर लोगों में तमाम तरह की चर्चा हो रही थी। हालांकि बीएसए गजराज खुद को साजिश के तहत फंसाने की बात कह रहे हैं।