- बरावफात जुलूस को लेकर एक ही समुदाय के दो पक्षों में थी खींचतान
- पारंपरिक स्थान पर ही होगा जुलूस का समापन
धर्मसिंहवा। कस्बे में निकलने वाले बरावफात जुलूस को लेकर आखिरकार प्रबंध समिति के गुट को तहसील प्रशासन ने जुलूस निकालने की स्वीकृति दे दी है। अब जुलूस मदरसे से निकाल जाएगा और पारंपरिक स्थान पर समापन होगा।
दारुल उलूम अहमदिया मेराजुल उलूम के पूर्व प्रधानाचार्य और वर्तमान प्रबंधक बरावफात के बीच जुलूस निकालने को लेकर दावेदारी पेश करते हुए तहसील प्रशासन से स्वीकृति की मांग किए थे। एसडीएम उत्कर्ष श्रीवास्तव की अध्यक्षता में थाने पर आयोजित पीस कमेटी की बैठक में दोनों पक्ष आमने-सामने भी हो गए थे। एसडीएम ने स्थानीय कस्बे में शनिवार को पहुंचकर स्थानीय लोगों से बयान लिया।
पूर्व प्रधानाचार्य अली अहमद का कहना था कि वर्ष 1972 से उन्हीं के नेतृत्व में यह जुलूस निकाला जाता रहा है। जुलूस उनके मकान के सामने से शुरू होता रहा और बाद में सलामती पढ़ने के बाद वहीं समाप्त भी होता था, जबकि मदरसे के प्रबंधक अकबाल अहमद दावा पेश कर रहे थे कि जुलूस मदरसे से संबंधित है। पहले जब मौलाना अली अहमद प्रधानाचार्य थे तब इनके नेतृत्व में निकला, वर्तमान में प्रधानाचार्य कोई और है तो ऐसी स्थिति में वर्तमान प्रधानाचार्य के नेतृत्व में जुलूस निकाले जाने की अनुमति मिलनी चाहिए।
एसडीएम ने प्रत्येक बिंदुओं पर बातचीत और जांच करने के बाद मदरसे के प्रधानाचार्य को जुलूस निकालने की अनुमति दी। अनुमति में पारंपरिक स्थान पर ही जुलूस समाप्त करने की भी बात लिखी गई है। एसडीएम द्वारा कहा गया है कि जुलूस में कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है लेकिन दो जुलूस नहीं निकलेगा।