मेंहदावल। तहसील मुख्यालय से करीब तीन किमी दूर बीएमसीटी मार्ग के सटे बाराखाल मोहल्ले में माता का मंदिर स्थित है। मां का यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। दुर्गा मंदिर वासंतिक नवरात्र में भक्तों से भरा रहता है। मान्यता है कि सच्चे दिल से मांगी गई हर मुरादें पूरी होती हैं।
सामान्य दिनों में भी यहां भक्तों की भीड़ रहती है। पूजा अनुष्ठान के साथ मंदिर में धार्मिक आयोजन होते है। मुंडन संस्कार व अन्य कार्यक्रम भी किया जाता है। सुबह-शाम शक्ति उपासकों की भीड़ जुटती है। मां के इस पवित्र स्थान को लेकर मान्यता है कि सैकड़ों वर्ष पहले यहां स्थित नीम के पेड़ को काटने के प्रयास के दौरान कुल्हाड़ी चलाने पर बार-बार वह फिसल जा रहा था। काफी प्रयास के बाद जब पेड़ पर कुल्हाड़ी चली तो खून के छींटे निकलने लगे।
लोगों ने देखा कि एक मूर्ति पर कुल्हाड़ी लगने से छींटे निकल रहे थे। जिसे चमत्कार मानकर लोगों ने तभी से पूजा पाठ शुरू करना शुरू कर दिया। आज भी मंदिर के गर्भ गृह में कुल्हाड़ी लगी मूर्ति स्थित है। तब से लेकर आराधना का सिलसिला वर्तमान में भी जारी है। मंदिर के पुजारी रामरतन ने बताया कि बाराखाल की दुर्गा माता की कालांतर से ही पूजा व उपासना होती आ रही है।