- ठंडक में बखिरा झील में प्रवासी पक्षियों की आवक बढ़ी
- बंधी बधाई कीमत पर चिड़ियों का शिकार बदस्तूर जारी
बखिरा। ठंडक बढ़ने के साथ ही बखिरा झील में प्रवासी पक्षियों की आवक बढ़ने लगी है। हजारों किमी की यात्रा करके प्रवासी चिड़िया बखिरा झील में अपना आशियाना बनाने के लिए आती हैं, लेकिन इन मासूम पक्षियों को शिकारियों द्वारा पकड़कर बाजार में मुंह मांगी कीमत पर बेच दिया जाता है, हालांकि क्षेत्रीय वनाधिकारी प्रीति पांडेय ने झील में शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध का दावा किया है, लेकिन शिकारियों ने रेंजर के दावे की हवा निकाल दी है।
हजारों की संख्या में लालसर, टिकिया, हुदहुद, पटेरा समेत दर्जनों प्रजाति की चिड़िया चार माह तक झील में बसेरा करती है, लेकिन सुरक्षित पनाहगाह के लिए आए प्रवासी चिड़ियों को शिकारी शिकार करके मुह मांगी कीमत पर बिक्री कर देते हैं। इन दिनों झील में सैकड़ो की संख्या में प्रवासी चिडियों का डेरा है। शिकारी दवा रखकर इन चिड़ियों का शिकार करते हैं। प्रतिदिन सैकड़ों चिड़ियों की तस्करी की जाती है, जबकि पक्षी विहार के जिम्मेदार शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध का दावा करते है।
चिड़ियों को खरीद कर ले जाने वाले व्यक्ति ने पहचान छिपाने की शर्त पर बताया कि वह शिकारियों से अक्सर चिड़ियों को लेकर जाता है। शिकारी इन चिड़ियों में टिकिया को तीन सौ से चार सौ प्रति नग व लालसर चिड़िया को पंद्रह सौ से दो हजार रुपये में बेच देता है। हालांकि पक्षी बिहार में क्षेत्रीय वनाधिकारी, वन दारोगा, वन रक्षक व नाविकों की मौजूदगी है। विभाग द्वारा दिन-रात गश्त का दावा किया जाता है।
वनकर्मी झील में लगातार गश्त करते है। इससे शिकार पर पूरी तरह से रोका गया है। यदि कोई पक्षियों के साथ पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- प्रीति पांडेय, क्षेत्रीय वनाधिकारी