संतकबीरनगर। प्रभारी सत्र न्यायाधीश रमेश दूबे की कोर्ट ने तत्कालीन परियोजना प्रबंधक विनोद कुमार श्रीवास्तव को शासकीय धन तीन करोड़ बारह लाख तीस हजार दो सौ दस रुपये का दुरुपयोग और धोखाधड़ी के मामले में दाखिल जमानत अर्जी सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया।
यूपी प्रोजेक्ट कार्पोरेशन लिमिटेड उत्तर प्रदेश सरकार का उपक्रम है। उक्त इकाई द्वार जनपद संतकबीरनगर में कलक्ट्रेट भवन के परिसर में आवासीय भवन निर्माण कार्य का संपादन कराया जा रहा है। विभिन्न शासनादेश द्वारा कॉर्पोरेशन को धन मिला। उक्त धन से कार्य कराने के लिए कार्यों का निरीक्षण एवं मूल्यांकन एक समिति से कराया गया। समिति की रिपोर्ट के अनुसार स्थल पर पाया गया निर्माण कार्य एवं किए गए भुगतान में अंतर पाए जाने पर यूपी प्रोजेक्ट कार्पोरेशन लिमिटेड ने उच्चस्तरीय समिति का गठन करते हुए विभागीय जांच कराई गई।
परियोजना में वित्तीय अनियमितता मुख्य रूप से वीके श्रीवास्तव तत्कालीन परियोजना प्रबंधक दोषी पाए गए। तीन करोड़ बारह लाख तीस हजार दो सौ दस रुपये रुपया के वसूली आदेश पारित किए गए। आरोपी के द्वारा अवर अभियंता, सहायक परियोजना प्रबंधक एवं परियोजना प्रबंधक तीनों पदों का दुरुपयोग करते हुए शासकीय धन का आहरण किया गया। वीके श्रीवास्तव के विरुद्ध शासकीय धन के दुरुपयोग एवं धोखाधड़ी के लिए थाना कोतवाली खलीलाबाद में सात दिसम्बर 2020 को केस दर्ज हुआ। आरोपी ने प्रभारी सत्र न्यायाधीश रमेश दूबे की कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दिया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता तथा पक्षों की बहस को सुनने के उपरांत आरोपी विनोद कुमार श्रीवास्तव पुत्र नारायण लाल श्रीवास्तव साकिन फरदहा पोस्ट घाटमपुर (औरहा) जिला मिर्जापुर की जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दी।