संतकबीरनगर। जिले में आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का नि:शुल्क इलाज करने वाले 24 अस्पतालों के डेढ़ करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इसे लेकर अस्पताल संचालक जब विभाग से कारण जानना चाह रहे हैं, तो उन्हें यह बताया जा रहा है कि दस्तावेज के चक्कर में यह रुपये फंसे हैं, जिससे अस्पताल संचालकों की परेशानी बढ़ गई है।
जिले में 24 निजी और सरकारी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं। इनमें आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का नि:शुल्क इलाज होता है। हर दिन इन अस्पतालों में करीब 20 से 30 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें जनरल सर्जरी से लेकर अन्य मरीज शामिल हैं। सर्जरी की बात करें तो करीब 10 के आसपास सर्जरी भी हो रही है। अलग-अलग सर्जरी के अलग-अलग रेट भी आयुष्मान योजना में तय हैं। अस्पताल संचालक इन मरीजों का ऑपरेशन तो कर दे रहे हैं, लेकिन सर्जरी के नाम पर रुपये लेने में अस्पताल संचालकों के पसीने छूट जा रहे हैं।
नाम न छापने की शर्त पर एक संचालक ने बताया कि ऑपरेशन के बाद रुपये लेना थोड़ा कठिन है। एक भी दस्तावेज अगर वैरीफाई के दौरान छूट जा रहे हैं, तो फिर से नए सिरे से कागजात जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जबकि, नियम के तहत 21 दिन बाद भुगतान हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। एक-एक केस में तीन से चार माह बाद भुगतान हो रहा है। यही वजह है कि 24 अस्पतालों के डेढ़ करोड़ रुपये फंसे हैं।
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क्लेम करने के 21 दिन बाद है भुगतान का नियम
आयुष्मान योजना के तहत अगर किसी मरीज का निजी अस्पतालों में इलाज होता है, तो वह 21 दिन के अंदर क्लेम कर सकता है। क्लेम करने के बाद 21 दिन बाद ही उसके भुगतान करने का नियम है। अगर 21 दिन के अंदर कोई क्लेम नहीं करता है तो उसे भुगतान नहीं किया जाएगा।
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आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का आंकड़ा
-एक लाख 64 हजार लाभार्थी परिवार।
-2,59,562 गोल्डन कार्ड बन चुका है।
- मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों को 90 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है।
-योजना के तहत 24 निजी अस्पताल चयनित।
-26,637 लाथार्थियों का उपचार हुआ।
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आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए यह प्रमाण जरूरी
आयुष्मान योजना के तहत उन्हीं लाभार्थियों का कार्ड बनाया जाता है, जिनका नाम 2011 की आर्थिक जनगणना में शामिल होगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री जन आरोग्य के तहत भी कार्ड बनाए जा रहे हैं। श्रम विभाग में पंजीकृत लोगों का भी कार्ड बनाया जाता है। 2011 की आर्थिक जनगणना के कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, सरकारी आधार पर ही पहचान पत्र) जरूरी है। गोल्डन कार्ड सीएचसी पर जाकर पात्रता जांच कराने के बाद बनवाया जाता है। इसके तहत पांच लाख तक इलाज परिवार का हर सदस्य निजी व सरकारी अस्पताल में करा सकता है।
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इन बीमारियों का होता है इलाज
-इसमें अपेंडिस्क, मलेरिया, हार्निया, पाइल्स, हाइड्रोसिल, पुरुष नसबंदी, डिसेंट्री, एचआइवी विथ कॉप्लिकेशन, बच्चेदानी ऑपरेशन, हाथ-पांव काटने सर्जरी, मोतियाबिंद, गांठ संबंधित बीमारी, इनफेक्टेड बनियान फूट, रेनल कॉलिक, यूटीआई, आंतों का बुखार, गैंगिलियन आदि बीमारी शामिल हैं।
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आयुष्मान योजना के तहत जिले में 90 फीसदी तक अस्पतालों को भुगतान किया जा चुका है, करीब डेढ़ करोड़ बकाया है, कागजातों में कमी के चलते यह समस्या है, जल्द ही उसका भी भुगतान कर दिया जाएगा।
-डॉ. जन्मेजय सिंह, जिला कार्यक्रम समन्वयक, आयुष्मान योजना