फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

साइबर ठगी पर वार : ऑनलाइन एफआईआर में नहीं दिखेगा मोबाइल नंबर

विज्ञापन
विज्ञापन
- खुद को पुलिस अधिकारी या विवेचक बता कार्रवाई के नाम पर पीड़ित से वसूली नहीं कर सकेंगे जालसाज
विज्ञापन


- यूपी कॉप एप पर एफआईआर में सिर्फ चार नंबर ही दिखेंगे स्पष्ट
- पुलिस ने एफआईआर में दर्ज नंबर के दुरुपयोग पर लगाई लगाम



संवाद न्यूज एजेंसी



संतकबीरनगर। यूपी कॉप एप में सेंधमारी करके साइबर ठगों ने जालसाजी का जो धंधा शुरू किया था, पुलिस ने उस पर लगाम लगाने का रास्ता निकाल लिया है। यूपी कॉप एप पर उपलब्ध रहने वाली एफआईआर की कॉपी में अब शिकायतकर्ता का पूरा मोबाइल नंबर नहीं दिखेगा। इसलिए अब साइबर ठग इस एप से एफआईआर की कॉपी डाउनलोड करके पीड़ित या आरोपियों के मोबाइल नंबर के जरिये उन्हें शिकार नहीं बना सकेंगे।

एफआईआर की कॉपी से मोबाइल नंबर हासिल करके फोन पर कार्रवाई की धौंस देकर जालसाज पीड़ितों से वसूली करने लगे थे। बीते दिनों में जिले में भी ऐसे कई मामले सामने आए थे। साइबर थाने और एसपी के माध्यम से मुख्यालय को इसकी रिपोर्ट भेजी गई थी। प्रदेशभर में बढ़ते ऐसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस ने रास्ता निकाल लिया है।
विज्ञापन




एफआईआर में दर्ज मोबाइल नंबर का दुरुपयोग रोकने के लिए यूपी कॉप के पोर्टल पर बदलाव किया गया है। नई व्यवस्था में अब एफआईआर में दर्ज पीड़ित, शिकायत लेखक और आरोपियों के मोबाइल नंबर के सभी 10 अंक दिखाई नहीं देंगे। यूपी कॉप एप पर एफआईआर की कॉपी में केवल शुरुआत के चार अंक ही स्पष्ट होंगे, बाद के छह अंकों को गोपनीय रखा जाएगा। ऐसे में फोन पर खुद को पुलिस अधिकारी या विवेचक बताकर कार्रवाई के नाम पर वसूली पर लगाम लगेगी।





इस तरह करते हैं फोन

साइबर ठग यूपी काॅप एप से एफआईआर में दर्ज शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर लेकर फोन करते थे। फाने पर खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए धौंस जमाते थे और संबंधित एफआईआर का हवाला देते हुए दर्ज केस में मनमाफिक या खिलाफ कार्रवाई के नाम पर डराते हुए रुपये की मांग करते थे। पीड़ित मनमाफिक कार्रवाई तो आरोपी कार्रवाई से बचने के लालच में जाल में फंस जाते थे। कई मामलों में थाने पहुंचने पर जालसाजी का खुलासा होता था।




आरोपियों का नाम भी कॉलम में नहीं दिखेगा



पिछले कुछ दिनों से यूपी कॉप एप पर अपलोड की जाने वाली एफआईआर में आरोपी के कॉलम में नाम दिखना बंद हो गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक यह व्यवस्था भी साइबर ठगी पर लगाम लगाने के लिए ही बनाई गई है। साइबर ठग पुलिस अधिकारी बनकर एफआईआर करने वाले वादी को झांसे में लेकर आरोपियों का नंबर लेकर उन्हें कार्रवाई से बचाने के नाम पर रुपयों की मांग करते थे।
विज्ञापन




यूपी कॉप एप से शिकायतकर्ताओं के मोबाइल नंबर लेकर साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। इस पर लगाम लगाने के लिए व्यवस्था में बदलाव किया गया है। एप पर एफआईआर में पूरे नंबर नहीं दिखने से जालसाज कोई दुरुपयोग नहीं कर सकेंगे।



- सत्यजीत गुप्ता, एसपी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें