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एटीएस टीम ने बघौली ब्लॉक दफ्तर में खंगाला परिवार रजिस्टर

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एटीएस टीम ने बघौली ब्लॉक दफ्तर में खंगाला परिवार रजिस्टर
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संतकबीरनगर। एटीएस की चार सदस्यीय टीम बृहस्पतिवार को बघौली ब्लॉक मुख्यालय पहुंची तो खलबली मच गई। नौरों गांव से पकड़े गए रोहिंग्या अजीजुल हक का नाम परिवार रजिस्टर में तलाशने में टीम जुटी रही। इधर फर्जी दस्तावेज के सहारे पासपोर्ट बनवाए जाने के मामले में कई लोग संदेह के घेरे में आ गए हैं।
बघौली ब्लॉक के कर्मियों ने बताया कि एटीएस की टीम में शामिल चार लोग अचानक पहुंचे। टीम ने एडीओ पंचायत रमेश प्रजापति के कक्ष में पहुंचकर सिहोरवा ग्राम पंचायत में स्थित नौरों गांव के बारे में जानकारी हासिल की। उसके बाद ग्राम पंचायत अधिकारी संजय गौतम को बुलाकर परिवार रजिस्टर और उसमें रोहिंग्या अजीजुल हक का नाम है अथवा नहीं, उसके बारे में पूछताछ की। ग्राम पंचायत अधिकारी संजय गौतम ने बताया कि परिवार रजिस्टर में उसका नाम शामिल नहीं है। जबकि एडीओ पंचायत रमेश प्रजापति ने बताया कि परिवार रजिस्टर और राशन कार्ड में भी इसका नाम नहीं है। वैसे परिवार रजिस्टर को टीम ने अपने कब्जे में ले लिया।
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वैसे एटीएस की टीम दो दिन पूर्व नौरों गांव निवासी बदरे आलम के घर पहुंची थी और पूछताछ की थी। बदरे आलम की पत्नी को पूछताछ के लिए एटीएस की टीम ख़लीलाबाद साथ लेकर गई थी। देर रात पूछताछ के बाद उसे वापस घर भेज दिया था। बदरे आलम ने बताया कि 14 वर्ष पहले मुंबई में उसके बेटे इनायतुल्लाह से अजीजुल हक की मुलाकात हुई थी। उसके बाद वह बेटे के साथ में ही नौरों आ गया था, लेकिन वह महज 15 दिन ही यहां रहा था। उसके बाद मुंबई चला गया था। आरोप है कि धोखे से अजीजुल हक उसका आधार कार्ड भी साथ उठा ले गया था।
बदरे आलम की पत्नी नाजिमा ने बताया कि अजीजुल हक लॉकडाउनज के दौरान सिद्धार्थनगर जिले के इटवा क्षेत्र की रहने वाली एक युवती से निकाह भी किया था। उसने एक शख्स की मदद से पासपोर्ट बनवाया था। उसके पासपोर्ट व आधार कार्ड बनवाने में उन लोगों का कोई भी सहयोग नहीं है। जबकि प्रधान के पति कमाल अख्तर ने कहा कि वह उसे नहीं जानते हैं। तत्कालीन जिम्मेदारों ने क्या किया, वह इसके बारे में कुछ भी नहीं बता सकते।
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सूत्रों के अनुसार रोहिंग्या अजीजुल हक के फर्जी दस्तावेज के सहारे पासपोर्ट बनवाने में मददगार लोग भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। उसके यहां के निवासी होने का सत्यापन, थाने स्तर से सत्यापन और एलआईयू विभाग की ओर से किए गए सत्यापन पर भी सवाल खड़ा हो रहा है। अजीजुल हक के जरिए फर्जी दस्तावेज पर दो बार भारतीय पासपोर्ट बनवाए जाने की बात एटीएस की जांच में सामने आ चुकी है। उसके बैंक खातों में भी लेन-देन के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। इसके टेरर फंडिग से नेटवर्क जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। वैसे जिले की पुलिस इस बारे में कुछ भी बताने से कतरा रही है।
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