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स्वयं से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें महिलाएं : प्रमोद

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स्वयं से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ें महिलाएं : प्रमोद
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कोरोना काल में आजीविका की चुनौती विषय पर आयोजित हुई गोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। कोरोना संक्रमण काल में आजीविका चुनौती बन गई। स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाओं ने कोरोना काल में मास्क, सैनिटाइजर और पीपीई किट बनाकर अपनी आय के स्रोत में वृद्धि की। इसके साथ ही कोरोना से बचाव के लिए लोगों को जागरूक भी किया। ये बातें भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से बृहस्पतिवार को कोरोना काल में आजीविका की चुनौतियां विषय पर आयोजित गोष्ठी में डीआरडीए के परियोजना निदेशक प्रमोद यादव ने कहीं।
परियोजना निदेशक प्रमोद यादव ने कहा कि समूह से जुड़ीं महिलाओं ने स्वयं अपनी प्रेरणा बनने और दूसरों को भी आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। महिलाओं को स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति जागरूक किया। शासन की ओर से समूह की महिलाओं के लिए तरह-तरह के काम दिए गए हैं। इसमें बैंक सखी भी हैं। एक गांव, एक बैंक की नियुक्ति की गई है। इसमें 144 बैंक सखियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। गांवों में छोटे-छोटे लेन-देन का कार्य बैंक सखी कर रही हैं। इसके जरिए उनकी आय में वृद्धि हो रही है। निदेशक स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार संस्थान अख्तर हुसेन ने कहा कि अब देश में महिलाओं को अपने अधिकारों का ज्ञान होने लगा है। बिना अधिकारों की जानकारी के कोई भी समाज तरक्की नहीं कर सकता है। अधिकारों के साथ-साथ उन्हें अपने कर्तव्यों का निर्वहन भी करना होगा। जिला मिशन प्रबंधक महजबीन खान ने कहा कि समूह की महिलाओं को आजीविका के नए-नए तरीके अख्तियार करने की जरूरत है। प्रशिक्षण लेने के उपरांत महिलाएं खुद अपनी आमदनी का स्रोत बनाएंगी। हुनरमंद महिलाओं को आगे आना ही चाहिए। कार्यक्रम में 30 महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
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प्रशिक्षणार्थियों ने कहा
स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं रीता सिंह और स्नेहलता ने कहा कि कार्यक्रम में जो जानकारियां मिली हैं, उसे जीवन में उतार कर आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। प्रशिक्षण लेकर खुद का रोजगार करेंगी और परिवार के खर्च में सहयोग करेंगी। इसी तरह साक्षी और महिमा पांडेय ने कहा कि समूह की महिलाओं को आगे बढ़ाने में सरकार पूरा ध्यान दे रही है। सामुदायिक शौचालय की देखरेख, बैंक सखी, बिजली बिल कलेक्शन जैसे कई कार्य समूह की महिलाओं को मिले हैं। इस काम को ठीक से करके आय में वृद्धि की जा सकती है। कोरोना काल में आजीविका की चुुनौती बनी, लेकिन खुद का रोजगार करके समूह की महिलाओं ने परिवार का आर्थिक बोझ हल्का किया।
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