संतकबीरनगर। नगर पालिका परिषद खलीलाबाद के सीमा विस्तार हुए करीब पांच साल से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन अब तक इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। स्थिति यह है कि कहीं बांस-बल्ली के सहारे बिजली की आपूर्ति हो रही है तो कहीं जल निकासी के इंतजाम नहीं हो सके हैं। स्वच्छ पेयजल के लिए शुरू की गई परियोजनाएं भी अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। इससे इन क्षेत्रों में रहने वाली करीब 50 हजार की आबादी की आस टूटने लगी है।
शासन ने एक अक्तूबर 2020 को नगर पालिका परिषद खलीलाबाद का सीमा विस्तार की घोषणा की। इसमें आसपास के 16 गांवों, सरैया, बड़गो, मैलाली, सरौली, सादिकगंज, बनियाबारी, गौसपुर, डीघा, कसैला, मोहद्दीनपुर, खटौली, पटखौली, उस्का खुर्द आदि को शामिल किया गया है। सीमा विस्तार हुए करीब पांच साल से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन यहां विकास की किरण नहीं पहुंच सकी है। हालांकि इन क्षेत्रों में नाली, सीसीरोड, पेयजल आदि के लिए कार्य योजना तैयार हुई। जिस पर करीब पांच करोड़ खर्च होने थे। इसमें 1500 नए पोल लगाकर पथ प्रकाश व्यवस्था और कुछ जगहों पर सीसी रोड का निर्माण कराया गया, लेकिन अधिकतर क्षेत्रों के लोगों को अब भी विकास का इंतजार है। वर्तमान स्थिति यह है कि पेयजल के लिए परियोजना पर अभी कार्य चल रहा है, जबकि छोटी पटखौली, बनियाबारी, कसैला, जनता मार्ग सहित कई क्षेत्रों में अब भी बांस-बल्ली के सहारे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। मोहद्दीनपुर और जनता मार्ग पर नाला का निर्माण कराया गया, लेकिन यह भी मुख्य नाले से नहीं जुड़ सका है। नेदुला चौराहे से सेंट थामस मार्ग पर कार्य शुरू कराया गया, लेकिन यह कार्य भी ठप हो गया है। सीमा विस्तारित क्षेत्र के निवासी सुनील कुमार, वीरेंद्र मौर्य, प्रभाकर शर्मा, सुरजा देवी, मालती, पूनम, अनीता आदि ने बताया कि पालिका क्षेत्र में शामिल होने के बाद उम्मीद जगी थी कि शहरी सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन अब विकास की आस टूटने लगी है।