- धनघटा क्षेत्र में 10 वर्ष में तीन लेखपाल और दो दरोगा हो चुके गिरफ्तार
- हर दूसरे साल दबोचे गए रिश्वतखोर
धनघटा। जनपद में आए दिन भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए आए दिन कार्रवाई की जा रही है। लेखपाल, दरोगा को घूस लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया जा रहा है लेकिन तब भी रिश्वतखोरी पर लगाम नहीं लग पा रहा है। घनघटा क्षेत्र में जमीन की पैमाइश कराने के एवज में लेखपाल को रिश्वत लेते एंटी करप्शन टीम ने गिरफ्तार किया है।
तहसील क्षेत्र में वर्ष 2014 में शुरू हुई रिश्वतखोरों की गिरफ्तारी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजस्व और पुलिस विभाग के पांच कर्मी 10 वर्षों के अंदर एंटी करप्शन टीम के हाथों गिरफ्तार हो चुके हैं लेकिन रिश्वतखोरी पर लगाम लगते नहीं दिख रहा है। बुधवार को जमीन की पैमाइश करने के लिए 10 रुपये रिश्वत लेने के आरोप में धनघटा तहसील का चर्चित लेखपाल जब पकड़ा गया तो तहसील में हडकंप मच गया।
रिश्वतखोरों को एंटी करप्शन टीम के हाथों पकड़वाने की शुरुआत वर्ष 2014 में सेमरी गांव निवासी डीएन पांडेय ने किया। नुकसान हुए गेहूं की फसल का मुआवजा दिलाने के लिए तत्कालीन लेखपाल भानु प्रताप सिंह उनसे 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। डीएन पांडेय ने मुआवजा दिलाने की सिफारिश करते रह गए लेकिन लेखपाल बगैर रिश्वत के किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं हुआ। अंत में थक हारकर शिकायत कर्ता ने एंटी करप्शन टीम के अधिकारियों से संपर्क किया। कुछ दिनों बाद टीम ने धनघटा थाना गेट के सामने एक चाय की दुकान पर रिश्वत लेते हुए लेखपाल भानु प्रताप सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
जमीन से विपक्षी को हटाने में रिश्वत लेते दरोगा गिरफ्तार
वर्ष 2016 में धनघटा तहसील क्षेत्र की खरबुजहिया गांव निवासी छाया देवी पौली चौकी इंचार्ज विनोद कुमार से जमीन की पैमाइश के बाद विपक्षियों को हटाए जाने की मांग को लेकर संपर्क किया। छाया देवी का आरोप था कि दरोगा विनोद कुमार कब्जा कराने के लिए 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहे थे। जिनमें से किसी तरह 10 हजार रूपये देकर असमर्थता व्यक्त की। दरोगा विनोद कुमार अपनी मांग पर अड़े रहे। उसके बाद छाया देवी ने एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया और विनोद कुमार को उनके आवास पर 10,000 रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। टीम के लोग जब दरोगा को पड़कर थाने पर लाए तो केस दर्ज करने में मुकामी पुलिस हीला-हवाली करती रही और देर शाम दरोगा विनोद कुमार थाने से भाग निकले।
जमीन की पैमाइश करानेके एवज में लेखपाल हुआ था गिरफ्तार
इसी तरह 2018-19 में चकिया निवासी प्रदीप पाल ने जमीन की पैमाइश के लिए लेखपाल राजदेव गुप्ता से संपर्क किया था। लेखपाल 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। जिसे दे पाने में प्रदीप पाल ने असमर्थता जाहिर किया, तो लेखपाल ने पैमाइश करने से इन्कार कर दिया। प्रदीप ने एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया और राजदेव गुप्ता को तहसील परिसर में ही एक अधिवक्ता के तख्ते पर प्रदीप पाल से 10 हजार रुपये रिश्वत लेते एंटी करप्शन की टीम ने दबोच लिया।
मुकदमे में चार्जशीट लगाने के लिए एवज में मांगा था घूस
2021 में कर्मा गांव निवासी अब्दुल्ला ने धनघटा थाने पर तैनात दरोगा राममिलन यादव से एक मुकदमे में चार्जशीट लगाने के लिए संपर्क किया। अब्दुल्ला का कहना था कि राममिलन ने चार्जशीट लगाने के नाम पर 20 हजार रुपये घूस की मांग की। वह 10 हजार रुपये दे भी दिए लेकिन वह चार्जशीट लगाने को तैयार नहीं हुआ। अंत में अब्दुल्ला ने एंटी करप्शन टीम से संपर्क करके राममिलन यादव को 10,000 रुपये रिश्वत लेते दरोगा के आवास से गिरफ्तार किया।