धनघटा। उप निबंधक कार्यालय भवन धनघटा तहसील परिसर में बनवाए जाने की मांग को लेकर 50 दिन से यहां के अधिवक्ता आंदोलन पर है। दूसरों को न्याय दिलाने के लिए जी जान लगा देने वाले अधिवक्ता खुद की लड़ाई लड़ने को विवश हैं।
अधिवक्ताओं के आंदोलन का सबसे अधिक प्रभाव वादकारियों पर पड़ रहा है। मुकदमे की तारीख के दिन तारीख लेकर तो लोग घर लौट ही रहे हैं साथ ही साथ नए मुकदमे का दाखिला भी नहीं हो पा रहा है और न ही नहीं मुकदमों का फैसला हो पा रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जनहित की मांग को लेकर 50 दिन से धरना चल रहा है। उप निबंधक कार्यालय धनघटा तहसील परिसर में बनाए जाने की मांग को लेकर इस बीच अधिवक्ता जिलाधिकारी से भी मिले और वह वकीलों को आश्वासन भी दिए। लेकिन 15 दिन का समय व्यतीत हो गया कोई परिणाम सामने नहीं आया।
अधिवक्ताओं की जायज मांग को सुनने में अधिकारी जब इतना विलंब कर रहे हैं तो आम जनता का कौन सुनने वाला है। सुलह समझौते की पहल न होने से लंबा खींच रहा आंदोलन। तहसील परिसर में रजिस्ट्री कार्यालय भवन के निर्माण को लेकर अधिवक्ताओं के आंदोलन के लिए पहल न तो जिला प्रशासन कर रहा है और न हीं कोई जनप्रतिनिधि उनके बीच जाकर उनकी बातों को सुन रहा है। जिसका खामियाजा वादकारियों को भुगतना पड़ रहा है।
वादकारी रामदयाल, शिव शंकर, शुभकरन, रामेश्वर, राम सिंह आदि का कहना है कि मुकदमा फैसला के करीब आया था। जिरह हो चुकी थी। लेकिन वकीलों के हड़ताल के कारण मामला लटका हुआ है।
हत्या के बाद जला रहे थे महिला की लाश
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