धनघटा। शनिवार को तहसील बार एसोसिएशन धनघटा की बैठक में 10 नवंबर तक न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया गया। साथ ही अधिवक्ताओं ने एसडीएम और तहसीलदार के कार्य पद्धति की निंदा करके उन पर मनमानी का आरोप लगाया।
बैठक में अधिवक्ता हनुमान प्रसाद चौधरी, लाल शरण सिंह, प्रेम नारायण मिश्र, दिलीप तिवारी, सुरेंद्र सिंह, विजयलाल श्रीवास्तव, प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, सुनील पांडेय, सुनील राय ने कहा कि बार-बार कहने के बावजूद एसडीएम और तहसीलदार अपने काम में सुधार नहीं ला रहे हैं। छोटे-छोटे कार्यों को भी सिस्टम से करने की बात कहकर टाल देते हैं।
एसडीएम डॉ. सुनील कुमार के द्वारा 126, 135, 170 बीएनएसएस प्रकरण में अनावश्यक रूप से निर्दोष, निरपराध लोगों को पूर्ण जमानत दाखिल करने के बावजूद खतौनी सत्यापन का बहाना बनाकर जेल भेजा जा रहा है तथा जमानत रात्रि के 8:30 बजे तक रोका जा रहा है। तहसीलदार भी एसडीएम के नक्शे कदम पर चलते हुए छोटे-छोटे कार्यों को टाल देते हैं।
अधिवक्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार भी नहीं कर रहे हैं। तहसील में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच चुका है। ऐसी सूरत में न्यायिक कार्य करना मुश्किल है। इस कारण अधिवक्ता 10 नवंबर तक न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। दूसरी तरफ एसडीएम डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि ऐसी कोई बात नहीं है। अधिवक्ता साथियों से बात कर उनके समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। संवाद