कलेक्ट्रेट में डीएम को ज्ञापन देते अधिवक्ता।
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साथी के शव की बरामदगी की मांग पर अड़े वकील
संतकबीरनगर। साथी रामगोपाल त्रिपाठी का अपहरण कर लखनऊ में हुई हत्या के पर्दाफाश के मामले में शव की बरामदगी नहीं होने से अधिवक्ता आंदोलित हैं। शुक्रवार को भी अधिवक्ताओं ने कामकाज नहीं किया। डीएम से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा। अधिवक्ताओं ने प्रकरण की सीबीआई जांच कराने के साथ ही आश्रितों को एक करोड़ की अहेतुक सहायता दिलाने की मांग की। मांगों के समर्थन में अधिवक्ताओं ने गोरखपुर, महराजगंज, बस्ती और सिद्घार्थनगर के अधिवक्ता संगठनों को पत्र भेजकर सोमवार से हड़ताल करने की अपील की। इधर, पुलिस ने बस्ती जेल में बंद आरोपियों से पूछताछ की अनुमति कोर्ट से प्राप्त कर ली है।
अधिवक्ता कृष्ण मोहन मिश्रा, महीप बहादुर पाल, चतुरजी शुक्ल, दुर्गेश मिश्र, संतोष चौधरी, शशि कुमार ओझा आदि ने कहा कि सात सितंबर को एआरटीओ के अधिवक्ता राम गोपाल त्रिपाठी की लखनऊ में अपहरण के बाद हत्या कर शव को इंदिरा नहर में फेंक दिया गया था। पुलिस ने हत्याकांड का पर्दाफाश किया, लेकिन 20 दिन बाद भी शव बरामद नहीं कर पाई। अधिवक्ताओं ने सीएम को संबोधित डीएम को सौंपे मांग पत्र में कहा है कि प्रकरण की सीबीआई से जांच कराई जाए। इसके साथ ही हत्यकांड में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए। शव की बरादमगी नहीं होने से पुलिस की कार्य प्रणाली पर सवाल खडा कराई जाए। आश्रितों को एक करोड़ की अहेतुक सहायता दिलाई जाए। डीएम ने प्रकरण में एसपी से वार्ता कर मामले का निस्तारण कराने का भरोसा दिया। एसएसआई सुभाष मौर्या ने बताया कि जेल में बंद अधिवक्ता हत्याकांड के आरोपियों से पूछताछ करने की अनुमति कोर्ट से मिल गई है। जेल में पहुंच कर आरोपियों से गहन पूछताछ कर अन्य जानकारियां जुटाई जाएगी।