संतकबीरनगर। सहालग का समय चल रहा है। ऐसे में मिठाइयों की डिमांड ज्यादा है। दूध का उत्पादन कम होने के बाद भी मिठाइया बनाई जा रही हैं। आप ऑर्डर दीजिए तो यहां पर केमिकल युक्त पाउडर से छेना मिठाई तैयार कर दे दी जाएगी। इसके साथ ही खोवा भी तैयार हो रहा है। बाहर से भी लाकर खोवा बेचा जा रहा है। यहां पर बिहार से कारीगर बुलाकर मिठाइयों को तैयार कराया जा रहा है।
शादी विवाह के मौसम में दरवाजे पर बरातियों के लिए तरह-तरह की मिठाइयां बनाई जाती हैं। कुछ लोग तो घर पर ही मिठाई बनवाते हैं लेकिन कुछ लोग बाजार से मिठाई खरीदना पसंद करते हैं। अगर आप बाजार से मिठाई खरीद रहे हैं तो सावधान रहें। क्योंकि इस समय बाजार में मिलावटी मिठाई को खपाया जा रहा है, जो आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है।
सहालग का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में मिलावट खोर भी सक्रिय हो गए हैं, जो मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों की सेहत की परवाह तक नहीं करते। दूध एवं उससे बनने वाले मावा और पनीर आदि में मिलावट की सबसे ज्यादा संभावना रहती है। जिले में मिलावटखोरी का धंधा नया नहीं है।
जिले में दूर का उत्पादन साढे आठ हजार लीटर के करीब है जबकि पनीर की डिमांड 200 क्विंटल तक पहुंच गई है। साथ ही मिठाई में खोवा की जरूरत होती है।
खराब मिठाई को फिर से बना देते है चाॅकलेट बर्फी : मिठाई एक सप्ताह से अधिक हो जाता है अथवा खराब हो जाता है तो कारीगर उसे फिर भूनकर चॉकलेट बर्फी बनाते हैं। इसमें वह चीनी का प्रयोग करते हैं। इसके बाद यह फिर बिक्री के लिए तैयार हो जाता है। अगर इसका लगातार सेवन किया जाता है तो वह पेट के लिए हानिकारक होता है।
लीवर पर सीधा असर डालती है केमिकल से बनी मिठाइयां :
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. कुमार सिद्धार्थ ने बताया कि सहालग के मौसम में जहां तक हो सके तो मिठाई खाने से बचना चाहिए। अगर लोग घर पर मिठाई बनवा रहे हैं तो उसे खाया जा सकता है। मिठाई में मिलावट सेहत के लिए नुकसानदेह है। इसमें अगर केमिकल युक्त रंग मिला है तो वह सीधे लीवर पर असर डालता है। पेट के लिए भी इस तरह के केमिकल नुकसानदायक होते हैं। ये किडनी, लीवर और पेट के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं।
मिठाई में डालते हैं सस्ता सिंथेटिक रंग
मिठाई की दुकान चलाने वाले एक दुकानदार ने बताया कि कुछ लोग मिठाई में सस्ता रंग डालते हैं, जो खाने रंग आता है वह आठ सौ रुपये किलो होती है, लेकिन रुपये बचाने के चक्कर में 200 रुपये किलो वाला रंग डालते हैं, जो सेहत के लिए हानिकारक होता है।