संतकबीरनगर। नवरात्र पर मिलावट खोर सक्रिय हैं। फलाहारी सामानों में भी मिलावट की जा रही है, जिसके सेवन से सेहत बिगड़ सकती है। पिछली बार के बचे सामानों को खपाया जा रहा है। अधिकांश फलों को कार्बाइड से पकाकर बाजार में बेचा जा रहा है।
पिछले साल शारदीय नवरात्र पर एक्सपायरी डेट का फाफड़ का आटा पकड़ा गया था। घी तक में भी मिलावट की जा रही है। नवरात्र पर ज्यादातर लोग नौ दिन का व्रत रखते हैं। इसके साथ ही साथ फलाहार पर रहते हैं। ऐसे में मिलावट खोर फिर सक्रिय हो गए हैं और पुराने बचे माल को फिर से बिक्री के लिए तैयार कर दिए हैं।
जानकारों के अनुसार कई दुकानों पर फाफड़ा का आटा पहले का बचा हुआ था। जिसका पैकेट बदल कर फिर से बेचना शुरू कर दिए हैं। शुद्ध फाफड़ा का आटा 180 से 200 रुपये किलो है जबकि मिलावटी आटा 100 रुपये किलो तक बेचा जा रहा है।
वहीं देशी घी भी 10 रुपये से 100 रुपये के पैकेट में बिक रहा है। इस पर लिखा कि यह घी सिर्फ पूजा के लिए है, इसका इस्तेमाल खाने में न करें। ऐसे में यह अंदेशा है कि इस घी में मिलावट की गई है। इसके साथ ही फलों को भी पकाने में रसायनों का प्रयोग किया गया है। इसमें सबसे जयादा केला को कार्बाइड से पकाया जा रहा है। इनके सेवन से फूड प्वाइजनिंग हो सकती है।
बता दें कि जिले में लगातार मिलावट का खेल चल रहा है। दीपावली पर लिए गए 32 नमूने में 16 नमूने फेल मिले हैं। जिसमे पनीर, दूध, खोवा, नमकीन आदि शामिल हैं।
समय फाफड़ा के आटे का नमूना लिया गया था जो अधोमानक मिला था। इसमें फफूंद लगा था, जिसे टीम ने नष्ट करा दिया था। वहीं मिलावट करने वाले दुकानदार पर सीजेएम न्यायालय में वाद दायर किया गया है।