संतकबीरनगर। अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट डॉक्टर दिव्यानंद द्विवेदी की अदालत ने दो किलो गांजा रखने के मामले में आरोपी पिंटू सोनकर को साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इसके साथ ही साथ विधि विज्ञान प्रयोगशाला की आख्या दाखिल न करने वाले विवेचक, पुलिस कर्मचारी को दायित्व का निर्वहन न कर पाने पर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई किए जाने का आदेश भी पुलिस अधीक्षक को दिया है।
वादी मुकदमा उपनिरीक्षक रुदल यादव ने नाै जनवरी 2014 को सुबह 7:00 बजे थाना कोतवाली खलीलाबाद में प्रार्थनापत्र दिया कि वह मय हमराही टेमा रहमत के पास पूर्वांचल बैंक पहुंचे, वहां तैनात सिपाहियों से बातचीत कर रहे थे कि एक वाहन डिवाइडर पर चढ़ गया। गाड़ी के पास पहुंचे तो एक व्यक्ति उतरकर पश्चिम की ओर भागने लगा। गाड़ी में तीन व्यक्ति बैठे मिले। एक ने अपना नाम पिंटू सोनकर खटीकहिया थाना हरैया बस्ती तथा शेष प्रदीप कुमार, हरिश्चंद्र और भागने वाले ने अपना नाम राजेश भुज बताया।
पूछताछ में पता चला कि उनके पास गांजा है। तलाशी लेने पर पिंटू के पास दो किलो गांजा पाया गया। विवेचना के बाद घटनास्थल का नक्शा नजरी, फर्द गवाहन की मौजूदगी कर पिंटू के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट में चालान कर दिया गया। न्यायालय में विचारण के समय आरोपी ने आरोप से इन्कार कर विचारण की मांग की। अभियोजन की ओर से चार गवाह और अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, परंतु अभियोजन पक्ष अभियोजन कथानक को साबित करने में असफल रहा।