एमसीए विंग अस्पताल में बंद पड़ा अल्ट्रासाउंड कक्ष।
- पिछले एक सप्ताह से नहीं आ रहे हैं एमसीएच विंग में तैनात रेडियोलाॅजिस्ट
- सीएमएस ने जारी किया नोटिस, नहीं आने पर दी कार्रवाई की चेतावनी
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संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिला अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट एक सप्ताह से बिना सूचना के नदारद हैं। इससे एमसीएच विंग में अल्ट्रासाउंड कराने वालों की दिक्कत बढ़ गई है। एक रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे 60 मरीजों की ही अल्ट्रासाउंड जांच हो पा रही हो रहा है, जबकि अल्ट्रासाउंड के लिए रोजाना 100 के करीब मरीज पहुंच रहे हैं। 40-45 जरूरतमंद बिना अल्ट्रासाउंड जांच कराए ही लौट रहे हैं या प्राइवेट में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए मजबूर हो रहे हैं। सीएमएस ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट को नोटिस जारी कर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए दो रेडियोलाॅजिस्ट तैनात हैं। तीन माह पहले सीएमएस ने महिला और पुरुष के लिए अल्ट्रासाउंड जांच की व्यवस्था अलग-अलग कर दी थी। महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच एमसीएच विंग में और पुरुषों की अल्ट्रासाउंड जांच जिला अस्पताल में शुरू कराई थी। एमसीएच विंग में रेडियोलाॅजिस्ट डॉॅ. शैलेंद्र चौधरी और जिला अस्पताल में डॉ. गोपाल को जिम्मेदारी सौंपी थी। इधर, एक सप्ताह से एमसीएच विंग में रेडियोलाॅजिस्ट नहीं आ रहे हैं। इससे महिलाओं को परेशानी रही है। सीएमएस ने परेशानी को देखते हुए डॉ. गोपाल को नौ से 11 बजे तक एमसीएच विंग और 11 बजे से दो बजे तक जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है। एक रेडियाेलाॅजिस्ट के चलते दिक्कत बढ़ गई है। बृहस्पतिवार को 11 बजे के बाद महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच बंद हो गई है। दोनों जगहाें पर मिलाकर 60 मरीजों की ही अल्ट्रासाउंड जांच हो पा रची है। बृहस्पतिवार को एमसीएच विंग में अल्ट्रासाउंड के लिए आई नैंसी, पायल, रामदुलारी का कहना था कि पेट में दिक्कत है। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड लिखा है, यहांं पर आई तो पता चला कि अल्ट्रासाउंड जांच बंद है। जांच 11 बजे तक ही होची है। यही हाल अन्य महिलाओं का रहा।
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एमसीएचस विंग में अल्ट्रासाउंड करने वाले रेडियोलाॅजिस्ट डॉ. शैलेंद्र चौधरी को चार दिन पूर्व नोटिस दिया गया था, पर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और मेडिकल भेज दिया। उनका मेडिकल स्वीकृत नहीं किया गया है। उन्हें तत्काल कार्य पर आने के लिए कहा गया है। अगर वह नहीं आते हैं तो महानिदेशालय को कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया जाएगा। -डॉ महेश प्रसाद, सीएमएस