संतकबीरनगर। चार दिवसीय छठ महापर्व के तीसरे दिन घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ा रहा। व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर संतान के दीर्घायु के साथ सुख-समृद्धि की कामना की कामना की। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। आज सुबह उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर महापर्व का समापन होगा।
चार दिवसीय छठ महापर्व के तीसरे दिन सोमवार को दोपहर तीन बजे ही छठ व्रतियों का नदी घाटों पर आना-जाना शुरू हो गया। श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ माथे पर डाला रखे हुए निकले। यही नहीं कुछ महिलाएं अपने शरीर से पृथ्वी को मापते हुए नदी घाटों तक पहुंचीं। स्थिति यह रही कि शाम साढ़े चार बजे तक सभी श्रद्धालु छठ माता की वेदियों पर पूजन करके सूप में पूजा का सामान और दीपक लेकर पानी में उतर गईं। छठ गीतों को गाते हुए महिलाओं और पुरुषों की टोलियां सूर्य के डूबने का इंतजार करने लगीं।
शाम 5:39 बजे सूर्य के डूबते ही महिलाओं ने उनको अर्घ्य देना शुुरू कर दिया। इस दौरान भारी संख्या में भीड़ नदी घाटों पर जुटी रहीं। खलीलाबाद में सबसे अधिक भीड़ पक्का पोखरा पर रही। यहां पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जहां पूजा करने के लिए पहुंचे थे। नगर के शुगर मिल परिसर पोखरा, मां समय जी पोखरा विधियानी, अमृत सरोवर बरई टोला, गोला बाजार का पक्का पोखरा के साथ ही सरैया, मिश्रौलिया, पटखौली, मोहद्दीनपुर, सरौली, गोरखल, गौसपुर, कसैला, डीघा समेत अन्य स्थानों पर भी छठ का पर्व धूमधाम से मनाया गया।
आज उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगी महिलाएं : छठ पूजा के चार दिवसीय कार्यक्रम के दौरान व्रती महिलाएं मंगलवार को उगते हुए सूर्य को अपना अर्घ्य देंगी। इस दौरान महिलाओं की टोली सूर्योदय से पूर्व ही नदी घाटों पर निकल जाएंगी। उदीयमान सूर्य की पूजा 28 अक्तूबर को प्रात: काल 6 बजकर 9 मिनट पर होगी।
छठ के इस महापर्व पर सूर्य को अर्घ्य देने के लिए डाला लेकर नाचते-गाते हुए श्रद्धालु नाचते-गाते हुए नदी घाटों पर पहुंचे। इस दौरान कई लोग बैंड बाजा और डीजे साथ लेकर पहुंचे। आगे-आगे डाला लिए हुए श्रद्धालु चल रहे थे। उनके साथ पीछे-पीछे गीत गाते हुए महिलाओं की टोलियां चल रही थीं। इस दौरान पूरे जनपद का माहौल भक्तिमय हो गया था।
छठ मैया के गीतों पर झूमें श्रद्धालु : छठ घाटों पर जाते हुए महिलाएं छठ माता के गीतों को गाती हुई चल रही थीं। छठ गीतों में केरवा जे फरेला घबद में...गीत गाकर व्रत की शुरुआत करते हैं। इस गीत ने लोगों के दिलाें में आस्था का संचार किया। वहीं महिलाओं ने कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय...गीत के जरिए घाट पर जाने वाली परंपरा को सजोया। ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय गीत को गाकर अपने वियोग का प्रदर्शन किया।
व्रती महिलाओं ने किया छठ माता का दर्शन : जिले के विभिन्न नदी घाटों पर छठ माता की मूर्ति की स्थापना की गई है। महिलाओं ने छठ माता की मूर्ति का दर्शन किया तथा उनसे आशीर्वाद मांगा। जिला मुख्यालय पर पक्का पोखरा के साथ ही शुगर मिल परिसर में बने पोखरे पर छठ माता की मूर्ति बनाई गई थी। वहीं मगहर, हरिहरपुर, महुली, बेलहरकला, राजघाट, मेंहदावल, बखिरा, लोाहरौली, नाथनगर, काली जगदीशपुर समेत अन्य स्थानों पर स्थापित छठ माता की मूर्तियों के लोगों ने दर्शन किया तथा उनका आशीर्वाद लिया।
घाटों पर रहे सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ड्रोन से हुई निगरानी : जिले के प्रमुख छठ घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। थानों से महिला पुलिस की भी ड्यूटी लगाई गई थी। कोतवाली खलीलाबाद क्षेत्र के साथ ही अन्य थाना क्षेत्रों में स्थानीय पुलिसकर्मियों को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं ड्रोन के जरिए भी छठ घाटों की निगरानी की जा रही थी। सादी वर्दी में भी पुलिसकर्मियों की तैनाती छठ घाटों पर की गई थी, ताकि कहीं पर कोई अप्रिय दुर्घटना न हो।
गोताखोरों को भी किया गया था तैनात : छठ घाटों पर स्थानीय स्तर पर गोताखोरों की भी तैनाती की गई थी। ऐसा इसलिए किया गया था कि महिलाएं पानी में खड़े होकर सूर्य के डूबने का इंतजार करती हैं। वहीं महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी छठ घाटों पर जाते हैं। इसको ध्यान