पुनीत कुमार मिश्र
संतकबीरनगर। एचआरपीजी कॉलेज बीएड की काउंसिलिंग में बवाल के बाद सेंटर से बाहर लगे महाविद्यालयों के स्टॉल को हटाया गया। छात्रों की माने तो अपने कॉलेजों में प्रवेश कराने के लिए लुभावने प्रचार प्रसार कर रहे लोग विद्यार्थियों से पूरी जानकारी ले कर कॉलेज हैक कर दे रहे थे। बिना कॉलेज च्वॉइस के ही कॉलेज लॉक का मैसेज आ जाता था।
बीएड की काउंसिलिंग में आने वाले विद्यार्थियों को मनपसंद कॉलेज को लॉक करना होता है। कॉलेज च्वॉइस करने के बाद फीस जमा कर पढ़ाई शुरू करते है। एक बार कॉलेज लॉक हो जाने के बाद उसे हटाया नहीं जा सकता है। एचआरपीजी कॉलेज में काउंसिलिंग के समय कॉलेज गेट के बाहर कई जिलों के महाविद्यालयों ने स्टॉल लगाकर आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रकार का प्रचार प्रसार कर रहेे थे। काउंसिलिंग वाले अभ्यर्थियों को पहले ही अपने स्टॉल पर बैठा लेते थे और आवभगत के बाद उनका रोल नंबर और रजिस्ट्रेशन नंबर नोट कर लेते थे। छात्र जब काउंसिलिंग सेंटर से बाहर निकलता था तो उसके मोबाइल पर कॉलेज लॉक हो जाने का मैसेज आ जाता था। यहां पांच अक्टूबर को काउंसिलिंग शुरू हुई तो सेंटर के बाहर लगे स्टॉल को क्यों नहीं हटाया गया। स्टॉल किसके आदेश पर लगाए गए थे। जब मामला बढ़ा तो पुलिस बुला कर स्टॉल क्यों हटवाए गए। यह प्रश्न चर्चा का विषय है। प्रभारी कोतवाल आरके राय ने बताया कि विद्यार्थियों की शिकायत पर बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी से वार्ता की और घटना क्रम की जानकारी दी है। इंटरनेट की गड़बड़ी से कॉलेज लॉक की बात बताई जा रही है। तहरीर मिलेगी तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।