संतकबीरनगर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण योजना के तहत 100 दिन काम करने वाले मजदूरों का स्मार्ट कार्ड बनाया जाएगा। मजदूरों को 100 दिन काम करने का प्रमाण पत्र बीडीओ से सत्यापित कराकर सीएमओ कार्यालय में जमा करना होगा। सीएमओ ने इसके लिए पहल करते हुए शासन को पत्र भी भेजने की तैयारी की है।
मनरेगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों से काम कराया जाता है। काम के बदले मजदूरों को मेहनताना भी दिया जाता है। भारत सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना में शामिल है। स्मार्ट कार्ड से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर ब्रदी विशाल ने मनरेगा मजदूरों का स्मार्ट कार्ड बनाए जाने को लेकर शासन में पहल करनी शुरू कर दी है। स्मार्ट कार्ड के लिए मनरेगा मजदूरों को 100 दिन काम करने का प्रमाण पत्र देना होगा। प्रमाण पत्र ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी से सत्यापित कराना होगा। सत्यापित प्रमाण पत्र को सीएमओ कार्यालय में जमा करना होगा। इसके बाद सीएमओ कार्यालय की टीम उक्त गांव में जाकर मनरेगा मजदूरों के प्रपत्रों की जांच करने के बाद स्मार्ट कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू करेगी। कार्ड बन जाने से मनरेगा मजदूरों को 30 हजार रुपये तक का इलाज मुफ्त होगा।
मनरेगा मजदूरों का भी स्मार्ट कार्ड बनाए जाने की योजना तैयार की गई है। मनरेगा मजदूरों को 100 दिन काम करने का प्रमाण पत्र बीडीओ से सत्यापित करवा कर कार्यालय में जमा करें। शासन से स्मार्ट कार्ड बनाए जाने के लिए अनुमति मांगी जा रही है। अनुमति मिलते ही स्मार्ट कार्ड बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
-डॉक्टर ब्रदी विशाल, सीएमओ
स्मार्ट कार्ड बनाने को मिले 2.10 लाख रुपये
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के पांचवें चरण में बनने वाले स्मार्ट कार्ड के लिए शासन ने 2.10 लाख रुपये जारी किए हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉक्टर राजेंद्र सिंह ने सीएमओ को पत्र भेज कर कहा है कि योजना को सुचारु रूप से चलाने के लिए प्रत्येक जिला मुख्यालय को 75 हजार तथा ब्लॉक मुख्यालय को 15 हजार रुपये स्वीकृत किया गया है। कुल मिलाकर संतकबीरनगर जनपद को 2.10 हजार रुपये जारी किया गया है। स्मार्ट कार्ड बनाने में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।