संतकबीरनगर। खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट आम बात हो गई है। लोग खुद जागरूक हो रहे हैं और त्योहारों पर कम से कम से कम दूध और इससे बनी चीजें खरीदने लगे हैं। मगर मिलावटखोरी पर कार्रवाई करने वाला खाद्य सुरक्षा विभाग सुस्त पड़ा है। पिछले साल मात्र 48 नमूने लिए गए। जिसमें से 24 फेल हुए। छह पर कार्रवाई हुई और जुर्माना वसूला गया। मगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सिर्फ त्योहारों के समय खानापूरी की जाती है। जिससे मिलावट का धंधा बदस्तूर जारी है।
गत वर्ष दीपावली के अवसर पर छह नमूने जांच के लिए विभाग ने लिए थे। नमूनों में छेने की मिठाई, सोनपापड़ी, रिफाइंड तेल, सरसों तेल, वनस्पति आदि जांच के लिए गोरखपुर के प्रयोगशाला में भेजे गए थे। जिसमें छेने की मिठाई अधोमानक मिला। इस मामले में फरवरी 2013 में एडीएम कोर्ट में विभाग ने वाद दायर किया है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनय सहाय के मुताबिक पिछले साल में कुल 48 नमूने जांच के लिए भरे गए थे। जिसमें से 24 नमूने फेल आए थे। उसमें 12 नमूने मिठाई के भरे गए थे। जिसमें से 7 नमूने फेल आए थे। दो नमूने खोआ के और एक नमूना बर्फी का अधोमानक पाया गया था। 17 मामलों में एडीएम कोर्ट में वाद दायर कर दिया गया था। 7 नमूनों की जांच सेंट्रल फूड लैब से दोबारा हुई थी। जिसमें तीन नमूने पास हो गए थे। इस वजह से 4 मुकदमे बाद में दायर हुए। नल्ली की जांच रिपोर्ट में अखाद्य कलर पाया गया था। इस तरह दो मुकदमे सीएजेएम कोर्ट में दायर किए गए थे। गत वर्ष छह मिलावटखोरों पर 6.15 लाख का जुर्माना हुआ था। जबकि इस साल चार मिलावटखोरों से 1.97 लाख जुर्माना वसूल किया गया है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि इस साल अब तक मिलावटी खोआ तीन बार पकड़ा जा चुका है। जिसमें दो बार कोतवाली पुलिस ने पकड़ा था। नमूने को जांच के लिए भेजा गया है। जांच रिपोर्ट में अधोमानक पाया गया। उसमें वाद दायर करने की तैयारी चल रही है। मिलावटी खोआ की सप्लाई कानपुर से मिलावटखोर करते हैं।