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दीवार ढहने से सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक की मौत

Sat, 13 Jul 2013 05:30 AM IST
Sant kabir nagar
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बेलहर। बखिरा थाना क्षेत्र के दासडीह गांव में एक व्यक्ति के निर्माणाधीन मकान के बरामदे की दीवार छज्जा सहित शुक्रवार को अचानक भरभरा कर ढह गई। दीवार के नीचे दब जाने से एक रिटायर्ड प्रधानाध्यापक की मौत हो गई और उनके दो पौत्र समेत चार लोग बुरी तरह से घायल हो गए। घटना के बाद गांव में कोहराम मच गया। गांव के लोग जुटे और घायलों को सेमरियावां स्थित सीएचसी ले गए। जहां घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने सीएचसी खलीलाबाद के लिए रेफर कर दिया।
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दासडीह गांव निवासी रिटायर्ड प्रधानाध्यापक भरथरी पाठक (75 वर्ष) का मकान निर्माणाधीन है। मकान के कुछ कमरे का छत लग गया। जबकि बरामदे तथा कुछ कमरे की दीवार एक साल पूर्व तैयार हुई थी और छत लगना बाकी थी। शुक्रवार की सुबह भरथरी पाठक मकान के बाहर बरामदे के पास अपने पौत्र नीरज पाठक (25 वर्ष) तथा राजन पाठक (17 वर्ष) पुत्रगण महेंद्र पाठक के साथ कुर्सी पर बैठे हुए थे। उसी दौरान उनके पट्टीदार तथा रिटायर्ड प्रधानाध्यापक रामअचल पाठक (70 वर्ष) तथा रामकुमार पाठक (30 वर्ष) पुत्र डीगुर पाठक पहुंच गए। वे लोग भी कुर्सी पर बैठकर आपस में बातचीत कर रहे थे। उसी दौरान अचानक बरामदे की दीवाल छज्जा के साथ ढह गई। जिसकी चपेट में पांचों लोग आ गए। घटना देख कर रिटायर्ड प्रधानाध्यपक भरथरी के परिजन शोर मचाए तो गांव के लोग जुट गए। ग्रामीणों ने काफी प्रयास कर दीवार के नीचे दबे लोगों को बाहर निकाला और आननफानन में सीएचसी सेमरियावां पहुंचाया। जहां डॉक्टरों ने देखते ही रिटायर्ड प्रधानाध्यापक भरथरी पाठक को मृत घोषित कर दिया। जबकि रिटायर्ड प्रधानाध्यापक के घायल पौत्र नीरज, राजन और पट्टीदार रामकुमार व रिटायर्ड प्रधानाध्यापक राम अचल पाठक का प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर बता कर सीएचसी खलीलाबाद रेफर कर दिया। रामकुमार और नीरज का इलाज सीएचसी खलीलाबाद में चल रहा था। जबकि दो अन्य लोगों को किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराए जाने की सूचना थी। घटना की सूचना पर नायब तहसीलदार त्रिपुरारी शुक्ल, कानूनगो काशी प्रसाद त्रिपाठी, हल्का लेखपाल सिद्धू प्रसाद व एसओ हंजल अंसारी मौके पर पहुंच गए थे।

काल बनी दीवार, सपना रह गया अधूरा
बेलहर। मकान की दीवार काल बन जाएगी यह रिटायर्ड प्रधानाध्यापक भरथरी पाठक ने कभी सपने में भी नही सोचा होगा। वे मौत के शिकार हो गए और उनके दो पौत्र गंभीर रुप से घायल है। जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। जिसमें घायल बडे़ पौत्र नीरज पाठक की हालज नाजुक है। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था। गांव के लोग भी गमगीन थे।
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दासडीह गांव निवासी रिटायर्ड प्रधानाध्यापक भरथरी पाठक के तीन बेटे क्रमश: महेंद्र पाठक, गजेंद्र पाठक और सत्येंद्र पाठक के अलावा दो बेटियां हैं। बेटे और बेटियों की परवरिश करने के साथ उनकी शादी करके जिम्मेदारियों से निवृत्त हो गए थे। आखिरी सपना था कि उनका अच्छा सा मकान बन जाए। वे मकान का निर्माण कार्य शुरू भी कराए थे। कुछ कमरे का छत भी लग गया था। बरामदे और कुछ कमरे की दीवार एक साल पूर्व तैयार कराए थे। छत लगवाने की सोच रहे थे। उनके तीनों बेटे मुंबई में रह कर कारोबार करते हैं। बड़ा बेटा महेंद्र घर पर थे और दो बेटे मुंबई में हैं। घटना से पूरे गांव में कोहराम मच गया। रिटायर्ड प्रधानाध्यापक की पत्नी बेलावती का रो-रो कर बुरा हाल था। पूरे परिवार के लोग सदमे मेें थे। गांव के लोग यही कह रहे थे कि प्रधानाध्यापक मकान पूर्ण कराने की बातें अक्सर किया करते थे। मकान की दीवार व छज्जा उनकी मौत का कारण बनेगी यदि यह उन्हें मालूम होता तो शायद बरामदे की दीवार से काफी दूर बैठे होते।
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