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मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार करेंगे वित्तविहीन शिक्षक

Tue, 23 Apr 2013 05:30 AM IST
Sant kabir nagar
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संतकबीरनगर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं वरिष्ठ नेता सरकारी धन के सदुपयोग के स्थान पर दुरुपयोग करना चाहते हैं। माध्यमिक शिक्षा में प्रदेश की 75 प्रतिशत शिक्षा भगवान भरोसे चल रही है। जिससे शिक्षकाें में नाराजगी है। आगामी 25 अप्रैल को मूल्यांकन केंद्र का ताला खुलने नहीं दिया जाएगा। वे सोमवार को जूनियर हाईस्कूल खलीलाबाद में उत्तर प्रदेश माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक संघ के जिला सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
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उन्होेंने कहा कि सरकार बनने से पूर्व ही समाजवादी पार्टी ने यह वादा किया था तथा अपने चुनाव घोषणा पत्र में भी लिखा था कि यदि उनकी सरकार प्रदेश में बनती है तो वित्तविहीन शिक्षकोें को जीवकोपार्जन के लिए मासिक मानदेय देंगे। सरकार बने एक साल से ऊपर हो गया। दो बजट भी पेश कर दिए गए लेकिन वित्तविहीन शिक्षकों के लिए एक रुपये का प्राविधान नहीं किया गया। संघ के प्रदेश महासचिव आफताब आलम ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि जिसने भी शिक्षकों की उपेक्षा की है उसकी सरकार का सर्वनाश हुआ है। सपा की सरकार को वित्तविहीन शिक्षकों के साथ वादाखिलाफी महंगी पड़ेगी। उन्होंने आह्वान किया कि शिक्षक धैर्य के साथ मूल्यांकन बहिष्कार में अपने निर्णय पर डटे रहें। मजबूर होकर सरकार को शिक्षकों के आगे झुकना होगा। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष समय देव पांडेय ने कहा कि 25 अप्रैल को होेने वाले मूल्यांकन बहिष्कार का आंदोलन वित्तविहीन व्यवस्था से जुड़े हुए लोगों के जीवन में खुशहाली के लिए इतिहास रचेगा। इस जनपद के तीनों मूल्यांकन केंद्रों पर संघ के जिम्मेदार पदाधिकारियों के नेतृत्व में मूल्यांकन कार्य शून्य का आंकड़ा प्रस्तुत करेगा। जिला महामंत्री मलय कुमार पांडेय ने कहा कि मूल्यांकन के बहिष्कार में माध्यमिक शिक्षक संघ के विभिन्न गुटों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। इसलिए हमारा आंदोलन अवश्य ही सफल होगा। सर्वप्रथम सम्मेलन की शुरूआत मुख्य अतिथि द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्जवल के साथ हुआ। इस अवसर पर संगठन मंत्री अनिल सिंह, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष रामचंद यादव, प्रदेश सचिव चंद्र भूषण मिश्र, दिग्विजयनाथ चतुर्वेदी, अशोक चौधरी, मोहम्मद वकील खान, बाबूलाल यादव, हरिशंकर सिंह, सत्यनारायण चौरसिया, सुभाष विश्वकर्मा, शिव कुमार, सिद्धनाथ चौरसिया, गोपाल जी यादव, मोहम्मद खालिद, अनुराधा चौधरी, संगीता, अमर राय, अभिमन्यु उपाध्याय, उर्मिला सिंह, लाल बहादुर चौधरी, किरन पांडेय, श्याम नारायण सिंह, धर्मराज मौर्य सहित भारी संख्या में वित्तविहीन शिक्षक मौजूद रहे।
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