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Sant Kabir Nagar News: हरिहरपुर में 22 किसानों से 945 क्विंटल गेंहू की हुई खरीद

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क्रय केंद्र हरिहरपुर में गेहूं की तौल कराते केंद्र प्रभारी हरिहर प्रसाद पाठक
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हरिहरपुर। गेहूं क्रय केंद्र हरिहरपुर में सोमवार तक 22 किसानों से कुल 945 क्विंटल गेहूं की खरीदारी हुई है। केंद्रों पर 15 जून तक गेहूं की खरीदारी होगी। क्रय केंद्र प्रभारी हरिहर प्रसाद पाठक ने बताया कि गेहूं बेचने के लिए अबतक 300 किसान पंजीकरण करा चुके हैं। पंजीकृत किसानों के गेहूं की तौल का कार्य जारी है।
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पूर्व में बोरे के अभाव में क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद ठप हो गई थी। क्षेत्र के हरिहरपुर, झिंगुरापार, लुतुही के केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण करा चुके किसान परेशान थे। खरीद ठप होने के चलते किसान अपनी उपज स्थानीय व्यापारियों के हाथों औने-पौने दामो पर बेचने के लिए विवश थे।
सोमवार को सभी केंद्रों पर बोरा पहुंचा तो खरीदारी शुरू हो गई। केंद्र प्रभारी ने बताया कि केंद्रों पर बोरा पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। पंजीकरण करा रहे किसानों का गेहूं खरीद पंजीकरण की तिथि से तीन-चार दिन के भीतर करा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र पर भी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। किसान पंजीकरण के लिए सीधे क्रय केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
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पीएफएमएस के जरिये सीधे किसानों के खाते में जाती है रकम

हरिहरपुर। पीएफएमएस यानि पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन एक ऑनलाइन सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन है। यह सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली केंद्रीय व्यवस्था है। क्रय केंद्र प्रभारी हरिहर प्रसाद पाठक ने बताया कि जिन किसानों का गेहूं तौल हो जाता है उनका पैसा पीएफएमएस के जरिये सीधे उनके खाते में पहुंचता है बशर्ते उनका आधार बैंक खाते से लिंक होना चाहिए। संवाद

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गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित नहीं

हरिहरपुर। क्रय केंद्रों पर बोरे की कमी के चलते बीते साल की अपेक्षा इस वर्ष गेहूं खरीद की रफ्तार सुस्त रही। अब तक क्रय केंद्रों के लिए गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित नहीं किया जा सका है। 15 जून तक चलने वाली गेहूं खरीद की प्रक्रिया के लिए किसान सीएससी और क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेचने के लिए पंजीकरण करा रहे हैं। संवाद



केसीसी खाते में रकम जाने से किसान असमंजस में

हरिहरपुर। अधिकतर किसान केसीसी खाताधारक हैं और केसीसी खाते आधार से लिंक हैं। ऐसे में जिन किसानों का केसीसी खाता नियमित नहीं है, उनके उपज की रकम खाते में पहुंचने पर बैंक पैसा काट ले रहे हैं। ऐसी स्थिति के चलते किसान क्रय केंद्रों पर अपनी उपज बेचने से कतरा रहे हैं। संवाद
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