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...कहीं अफसान कहीं गजल बनकर आती है जिंदगी

Sun, 27 Jan 2019 10:42 PM IST
राकेश पांडेय ब्यूरो/अमर उजाला संतकबीरनगर
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जनसाहित्यक मंच के काव्य गोष्ठी में पुस्तक का विमोचन करते कवि। - फोटो : अमर उजाला
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संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में खलीलाबाद पब्लिक स्कूल परिसर में मासिक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें सत्येंद्रनाथ मतवाला ने अपनी रचना तरह-तरह गुल खिला किस-किस मोड़ पर लाती है जिंदगी, कहीं अफसान कहीं गजल बनकर आती है जिंदगी। सुनाकर काव्य गोष्ठी की शुरुआत की।
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डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग ने अपनी छाया से भी अब डरने लगा हूं, रिक्तता को गीत से भरने लगा हूं। सुनाकर गीत के महत्व को बताया। सागर गोरखपुरी ने माथ मुकुट हिमालय तो है, सागर कर प्रणाम, हिंद की धरती तुझे सलाम... सुनाकर माहौल को देशभक्ति से भर दिया। डॉ. पंकज कुमार सोनी ने गीत मेरी कल्पनाओं का मुखर अंदाज है, गीत मेरी भावनाओं का अनोखा साज है... सुनाया। डॉ. अफजल बस्तवी ने उसके दिल में एहसास ए वफा क्या मालूम, वह भी करता है मेरे हक में दुआ क्या मालूम... सुनाकर वाहवाही लूटी। शाद नंदौरी ने भ्रष्टाचार मकरंद हो गया, अब भारत स्वच्छ हो गया... सुनाकर बढ़ रहे भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया। युवा कवयित्री ज्योति सिंह अहसास ने हर जगह चल रही चिंताएं, धरती मॉ कितने आंसू बहाए... सुनाकर बढ़ रहे अपराधों की ओर इशारा किया। मनोज कुमार अनिल ने करें वंदना आज गुरुओं की हम... सुनाकर गुरुओं का सम्मान बढ़ाया। इस दौरान छविराज राज, हामिद खलीलाबादी, जेपी शुक्ला, अवधेश पांडेय, नरसिंह नारायण कमल, डॉ. एमएम इस्लाम, राधेश्याम मिश्र, ब्रहमनाथ पांडेय और पवन सबा आदि ने भी रचनाएं पढ़ीं।
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