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शौचालय निर्माण में गड़बड़ी, आवंटन से कम मिले निर्माण
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डीपीआरओ ने रैंडम चेकिंग के बाद ग्राम पंचायत सचिवों को दिए दोबारा गणना के निर्देश
वर्ष-2014 से अब तक बने शौचालयों की गणना कराकर देनी है जानकारी

अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। जिले को ओडीएफ बनाने के लिए पिछले चार वर्ष में ग्राम पंचायतों को शौचालय निर्माण के लिए बजट आवंटित किया गया, लेकिन जब उनकी गणना शुरू हुई तो आवंटन और निर्माण में अंतर आया। रैंडम चेकिंग में गड़बड़ी पकड़ी गई तो डीपीआरओ ने फिर से गणना के निर्देश दिए हैं। पहले सभी नौ ब्लॉकों में एक-एक सचिवों के कार्यक्षेत्र में गणना कराई जानी है।
वर्ष-2012 में हुए हाउस होल्ड सर्वे के आधार पर जिले में शौचालय निर्माण कार्य दिसंबर तक पूरा कराया गया। उस सर्वे के आधार पर जिले में दो लाख 34 हजार शौचालय बने हैं। जब इनकी जियो टैगिंग (कार्य की फोटो) कराई गई तो आवंटन और निर्माण में अंतर आने लगा। कई सचिवों ने गड़बड़ी छिपाने के लिए एक ही शौचालयों की अलग-अलग एंगल से फोटो अपलोड करा दी। ऐसे फोटो रिजेक्ट करते हुए दोबारा फीडिंग कराई गई। इसके बाद भी निर्माण और आवंटन का अंतर खत्म नहीं हुआ। डीपीआरओ ने सभी ब्लॉकों में खुद रैंडम चेकिंग की। सबसे ज्यादा अंतर बघौली व हैंसर ब्लॉकों में मिला। आवंटन के सापेक्ष निर्माण कार्य नहीं मिलने पर डीपीआरओ ने अन्य ब्लॉकों में भी जांच कराई। विभागीय सूत्रों की मानें तो 100 से अधिक ग्राम पंचायतों में इस तरह की गड़बड़ी सामने आई है।
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डीपीआरओ ने सभी ब्लॉकों के चिह्नित ग्राम पंचायत सचिवों को वर्ष-2014 से अब तक हुए आवंटन का वर्षवार डिटेल भेजकर उस अनुरूप निर्माण कार्य की गणना कर रिपोर्ट देने को कहा है। इस कार्य की निगरानी संबंधित ब्लॉक के एडीओ पंचायत करेंगे। वे ही इस बात की पुष्टि करेंगे कि आवंटन के सापेक्ष निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके बाद फिर इन गांवों की रैंडम चेकिंग की जाएगी। यदि दोबारा गणना के बाद भी अंतर मिलता है तो इसे वित्तीय अनियमितता मानते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू होगी। डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि ग्राम निधि और व्यक्तिगत खातों में भी शौचालय निर्माण के लिए धन भेजा गया है। रैंडम चेकिंग में कई जगह आवंटन के सापेक्ष निर्माण नहीं मिलना गड़बड़ी की आशंका को बढ़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए दुबारा गणना व रैंडम चेकिंग का निर्देश दिए गए हैं।
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