संतकबीरनगर। गणतंत्र दिवस पर में सुबह प्रभात फेरी निकाली जाएगी। इसके अलावा सांस्कृतिक, पौधरोपण, खेलकूद आदि कार्यक्रम होंगे और पुलिस लाइंस में परेड होगी।
26 जनवरी को सुबह 7.30 बजे जिले भर में प्रभात फेरी निकाली जाएगी।
8.30 बजे सभी सरकारी भवनों पर तिरंगा फहराया जाएगा। 9.15 बजे कलेक्ट्रेट में पौधरोपण होगा। 9.30 बजे पुलिस लाइंस में पुलिस परेड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। 10.00 बजे विद्यालयों, पंचायत भवनों, सार्वजनिक स्थलों पर ध्वजारोहण और महापुरूषों की मूर्तियों पर माल्यार्पण होगा। 9 बजे से खलीलाबाद में खेलकूद क्रास कंट्री और 11 बजे रस्साकसी प्रतियोगिता होगी। 10.30 बजे सभी विद्यालयों में खेलकूद, वाद विवाद एवं निबंध लेखन प्रतियोगिताएं होंगी। इसके अलावा दिन में 2 बजे सामूहिक मार्च पास्ट होगा। जिसमें स्काउट व एनसीसी कैडेट मार्च पास्ट करेंगे। 3.30 बजे से सात बजे तक आजाद चौक पर सार्वजनिक सभा होगी। रात 8 बजे काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया है। कार्यक्रमों के सफल संचालन के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों को जिम्मेदारियंा सौपी गई है। डीएम मार्कंडेय शाही ने बताया कि गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है।
सम्मानित किए गए शहीदों के परिजन
मगहर में शहीद सम्मान समारोह आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
मगहर।
देश की सुरक्षा और रक्षा करने का दायित्व जांबाज जवानों के जिम्मे रहता है, जिनके बलबूते पर देश का नागरिक चैन की नींद सोता है। देश की सेवा करते हुए जवान शहीद हो जाते हैं। उक्त बातें मगहर के काजीपुर चौराहे पर आयोजित शहीद सम्मान समारोह में राष्ट्रीय युवा हिंदू वाहिनी के राष्ट्रीय संयोजक अतुल मिश्रा ने कही।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के जांबाज जवानों ने देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए। उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि तब होगी जब उनके परिवार व आश्रितों को सम्मान दिया जाएगा। सम्मान समारोह में शहीद अशोक कुमार यादव के पिता भगवान दास यादव तथा शहीद रामप्रताप के भाई जगदीश यादव को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को कबीर चौरा मठ के महंत विचार दास, पंडित जनार्दन मिश्रा, उमेश तिवारी, वेद प्रकाश चौबे, जगत नारायण सिंह, सुरेश गुप्ता, पूर्व चेयरमैन अश्वनी कुमार गुप्त ने संबोधित किया। संचालन संदीप वर्मा तथा अध्यक्षता जिलाध्यक्ष शक्ति दत्त भारती ने किया। इस मौके पर राष्ट्रीय सचिव अनिल सिंह, महीप पांडेय, आशुतोष कुमार, राजकमल मिश्रा, गौरव मिश्रा, विजय प्रकाश कान्दू, धर्मेंद्र गुप्ता, विपिन श्रीवास्तव, अमित कुमार, ओम प्रकाश निर्भीक, मक्खन गुप्ता, सुजीत गुप्ता, संदीप मिश्रा, भोला गुप्ता आदि मौजूद रहे।
जेल यातना के बाद भी नहीं आई आत्मविश्वास में कमी
पूर्वांचल मेें स्वतंत्रता आंदोलन के नायक रहे पंडित लालसा प्रसाद
राजा चंगेरा के खिलाफ मिश्र बंधुओं ने फूंका था विद्रोह का बिगुल
तारेश सिंह
मेंहदावल। आजादी के दीवानों पर अंग्रेजों के खिलाफ जनून सवार था, जेल हो या संपत्ति की कुर्की करके आर्थिक तंगी पैदा करने की सजा, लेकिन देशभक्तों को इसकी परवाह नहीं थी। मेंहदावल ब्लॉक के ग्राम रक्शा गांव निवासी मिश्र बंधुओं लालसा प्रसाद, वंशराज, श्यामलाल और द्विजेंद्र मिश्र ने ब्रिटिश झंडा उतारकर तिरंगा लहराने के लिए संघर्ष जारी रखा। उनके बुलावे पर अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद और पंडित जवाहरलाल नेहरू मेंहदावल आए थे।
मेंहदावल ब्लॉक के रक्शा ग्राम निवासी पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं सेनानी के परिजन जवाहर लाल मिश्र बताते हैं कि उनके बाबा पंडित पटेश्वरी प्रसाद मिश्र के छह पुत्रों में से चार लालसा प्रसाद, वंशराज, द्विजेंद्र एवं श्यामलाल मिश्र ने पढ़ाई जीवन से ही स्वतंत्रता आंदोलन की कमान संभाल ली थी। तत्कालीन बस्ती जनपद स्थिति सक्सेरिया इंटर कॉलेज में पढ़ते समय सबसे बड़े पिता लालसा प्रसाद ने देश को स्वाधीन कराने की ठान ली थी। वर्ष 1933 में उन्होंने अंग्रेजी सरकार के खासमखास रहे राजा चंगेरा के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंक दिया और सैकड़ों क्रांतिकारियों के साथ बांसी स्थित उसके महल के सामने भारत माता जय का नारा लगाया, जिस पर उन्हें जेल जाना पड़ा था। जेल से छूटने के बाद उन्होंने डोहरिया में ट्रेन से सरकारी खजाना लूटने की घटना का नेतृत्व किया। इसके बाद तिलमिलाई अंग्रेजी सरकार ने मिश्र बंधुओं को जिंदा या मुर्दा पकड़ने का फरमान जारी कर दिया था। ट्रेन लूट कांड में लालसा प्रसाद मिश्र को छह माह की कैद व सौ रूपये जुर्माना भरना पड़ा। उनके जेल में रहने के दौरान श्यामलाल मिश्र ने कमान संभाला और उनके बुलावे पर चंद्रशेखर आजाद मेंहदावल आए थे और क्रांतिकारियों के साथ बैठक कर राजा चंगेरा को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। आगे बताते हैं कि चंद्रशेखर आजाद ने बांसी स्थिति राजा चंगेरा के महल पर धावा बोला था पर मुखबिरी के कारण राजा चंगेरा महल छोड़कर पहले ही फरार हो गए थे। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन तथा सविनय अवज्ञा आंदोलन का नेतृत्व करने के कारण मिश्र बंधुओं को नैनी जेल भेजा गया। जहां पर 1942 में लालसा प्रसाद से पंडित जवाहर लाल नेहरू की मुलाकात हुई। इसके बाद गाजीपुर जेल में आरएस पंडित एवं लालबहादुर शास्त्री के साथ मिश्र बंधुओं ने जेल काटा। मिश्र बंधुओं पर अंग्रेजों की नाराजगी का आलम यह था कि लालसा प्रसाद मिश्र के इकलौते पुत्र की मौत हो जाने पर भी उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अनुमति नहीं दी गई। 1946 में श्यामलाल मिश्र के बुलावे पर पंडित जवाहरलाल नेहरू रक्सा गांव आए थे और यहां से उन्होंने नौदरी व अछिया के बीच स्थिति बाग में क्रांतिकारियों की सभा को संबोधित किया था ।