संतकबीरनगर। जिले के 31 गांवों की करीब 80 हजार आबादी को दूषित पानी पीना पड़ रहा है। इनमें से अधिकांश गांव हर साल इंसेफेलाइटिस व अन्य संक्रामक बीमारियों की चपेट में रहते हैं। इन गांवों में शुद्घ पेयजल के लिए विश्व बैंक की मदद से 57 करोड़ की लागत वाली 24 पेयजल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। अधिकांश काम पिछले वित्तीय वर्षों के हैं, लेकिन अब तक एक भी काम पूरा नहीं हो पाया है। कहीं ओवरहेड टैंक बनाकर छोड़ दिया गया है तो कहीं काम शुरुआती दौर में है। इसके चलते लोग साधारण हैंडपंप का पानी पी रहे हैं।
जेई और एईएस से प्रभावित इस जिले में लोगों को स्वच्छ पेयजल मिले, इसके लिए वर्ष 2017-18 में ग्रामीण पाइप पेयजल परियोजना तैयार कर शासन को मंजूरी के लिए भेजा गया था। इसके तहत विश्व बैंक के सहयोग से जिले के 31 गांवों के लिए 57 करोड़ की लागत से 24 पेयजल परियोजनाओं को शासन ने मंजूरी दी थी। इन परियोजनाओं में ओवरहेड टैंक के साथ ही ढाई हजार किलोमीटर की लंबाई में पाइप लाइन बिछाई जानी है। बाउंड्रीवाॅल, पंप हाउस आदि का निर्माण कार्य कराया जाना है। कार्य की सुस्ती से कहीं ओवर हेड टैंक अधूरा है तो कहीं काम शुरू ही नहीं हुआ है। जहां ओवरहेड टैंक का निर्माण हो गया है, वहां पाइप लाइन बिछाने का कार्य अधूरा है।