दसवीं मोहर्रम का जुलूस शनिवार को जनपद में पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाला गया।
इसमें ताजियों के आगे नव युवकों की टोली, ढोल और ताशों के साथ लाठी-डंडे, गतके, तलवार, भाला आदि के कलाओं का नजारा पेश करती रही।
वहीं वातावरण में ...या हुसैन, या हुसैन की सदाएं गूंजती रहीं। देर रात आबादी से बाहर कर्बला में फातिहा के साथ करीब 750 ताजिए दफन किए गए।
खलीलाबाद में दसवीं मुहर्रम का जुलूस शनिवार को अंसार टोला, पठान टोला, बरदहिया बाजार, विधियानी, बंजरिया सहित अन्य मुहल्ले से ताजियों के साथ निकाला गया।
मेंहदावल चौक पर सभी जुलूस आकर मिले। इस दौरान युवाओं ने तलवारबाजी और गतके के हैरतअंगेज कारनामे दिखाए तो वहीं ढोल, ताशा, झाल और झांझ बजाकर लोगों को झूमने पर मजूबर कर दिया।
विभिन्न आकारों में बने ताजिए आकर्षण का केंद्र रहे। पर्व पर शिया वर्ग के अलावा सुन्नी वर्ग के लोगों ने भी उपवास रखा। हिंदुओं में भी इसकी आस्था दिखी।
अपनी मुरादों के लिए मन्नतें मांगी। मन्नतें पूरी होने पर छोटी ताजिया बनवाकर फातिहा करवाया। पायक बने लोग ताजियों को हवा देते वक्त ..या हुसैन, या हुसैन की आवाजें लगाते रहे।
इस दौरान जगह-जगह शरबत आदि का भी प्रबंध रहा। मगहर प्रतिनिधि के अनुसार शेरपुर, काजीपुर, इस्लामनगर, तकियाबाजार सहित अन्य स्थानों पर रखे गए ताजिए को मसनवी के कर्बला में दफन किया गया।
इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में गड़सरपार, मुहम्मदपुर, गिरधरपुर, बेलौली, धौरहरा, अशरफाबाद, कोडऱी, मंझरिया आदि गांवों में स्थापित ताजियों को कर्बला में लाकर दफन किया गया।
लोहरैया प्रतिनिधि के अनुसार मुसलमान भाईयों ने ताजिया का जुलूस क्षेत्र टाड़ा, बारीडीहा, बभनौली, डिहवा, घोरांग, सिरसी, बेलमा, बंसवारी, बंडा, सेमरडाड़ी, रूपिन, डिहवा, शनिचरा, दुलहापार, पौली,सोनहन,रोशया बाजार, चकिया धुसवा, नावन करमा आदि स्थानों से निकालकर दफन किया गया।
इसी तरह से मेंहदावल सहित अन्य क्षेत्रों के ताजियों को चौक से कस्बे में जुलूस निकालकर स्थानीय कर्बला में दफन किया गया।