बाघनगर। इस्लामी कैलेंडर की माह शाबान की पंद्रहवी तारीख की रात को शब ए बरात होती है। इस बार 20 अप्रैल अर्थात शनिवार की रात को शब ए बरात मनाया जाना है। मुस्लिम समाज शब ए बरात की रात में कब्रिस्तान जाकर अपने पूर्वजों के लिए दुआ मगफिरत करते है।
सेमरियावां के मौलाना फुजैल अहमद नदवी ने बताया कि शब का अर्थ रात और बरात का अर्थ छुटकारा और माफी मिलना। शब ए बरात जहन्नुम से छुटकारा पाने और गुनाहों से माफी मांगने की रात है। यह रहमत और बरकत वाली रात है। मौलाना निसार अहमद नदवी ने बताया कि इंसान का कितना भी बड़ा गुनाह या पाप क्यों न हो अल्लाह इस रात तौबा करने से माफ कर देता है। मुसलमानों को शब ए बरात की रात खुदा के जिक्र, कलाम पाक की तिलावत और नमाज में गुजारनी चाहिए। देवरिया नासिर के अफसरूद्दीन ने कहा कि शब ए बरात की रात को साल में पैदा होने वाले और मरने वाले का नाम लिख दिया जाता है। इस रात इंसान के अच्छे काम उपर उठा लिए जाते है और इसी रात साल में मिलने वाली रोजी का फैसला होता है। पिपरा गोविंद निवासी मसीनुद्दीन ने कहा कि मुसलमानों को शब ए बरात में कब्रिस्तान जाकर अपने पूर्वजों और अपने लिए दुआ व मगफिरत मांगनी चाहिए। रात में जागकर एकांत जगह बैठकर खुदा की इबादत, कुरआन की तिलावत करें, नमाज पढना चाहिए और अगले दिन रोजा रखना चाहिए।