623 स्कूलों में बंद हो जाएगा एमडीएम
खलीलाबाद, सेमरियावां और हैंसर ब्लॉक में स्थिति बिगड़ी
आपूर्ति व बेसिक शिक्षा विभाग एक-दूसरे पर कर रहे दोषारोपण
अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। स्कूली बच्चों का मध्याह्न भोजन भी अफसरों की लापरवाही के चलते संकट में है। जिले के 623 स्कूलों में खाद्यान्न के अभाव में मध्याह्न भोजन बनना एक-दो दिन में ही बंद हो जाएगा। खलीलाबाद, हैंसर और सेमरियावां ब्लॉक में स्थिति बेहद खराब है। खलीलाबाद के खंड शिक्षाधिकारी ने तो बीएसए को पत्र लिखकर खाना बनवाने में असमर्थता भी जता दी है।
जिले में कुल 1603 विद्यालय एमडीएम से लाभान्वित हैं। इसमें 1075 प्राथमिक, 443 उच्च प्राथमिक विद्यालय, 34 एडेड इंटर कॉलेज, 15 मदरसा, एक संस्कृत विद्यालय शामिल है। एमडीएम के लिए खाद्यान्न (चावल और गेहूं) सरकार कोटेदार के माध्यम से देेती है, जबकि मसाला, तेल व सब्जी समेत अन्य सामग्री के लिए स्कूलों को कनवर्जन कास्ट भेजा जाता है। बेसिक शिक्षा विभाग का एमडीएम सेल हर तीन माह पर मध्याह्न भोजन के लिए आवंटन खाद्य एवं विपणन विभाग को भेजता है। इस आधार पर खाद्यान्न का उठान होता है। अक्तूबर से अब तक खाद्यान्न का उठान नहीं हुआ है। इससे खलीलाबाद ब्लॉक के 243, हैंसर के 186 और सेमरियावां के 194 विद्यालयों में खाद्यान्न समाप्त हो चुका है। खलीलाबाद ब्लॉक के खंड शिक्षाधिकारी प्रमोद त्रिपाठी ने वरिष्ठ विपणन निरीक्षक और बीएसए को पत्र भेजकर भोजन बनवाने में असमर्थता जताई है। उन्होंने लिखा है कि तमाम प्रधानाध्यापकों ने अवगत कराया है कि कोटेदार के जरिए त्रैमासिक खाद्यान्न न दिए जाने के कारण भोजन बनवाना संभव नहीं है। खाद्यान्न मांगने पर कोटेदार कहते हैं कि खाद्यान्न का उठान नहीं हुआ है।
समस्या का जल्द हो जाएगा समाधान
बीएसए सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि डिप्टी आरएमओ से बात हुई है। जल्द ही समस्या का समाधान करा दिया जाएगा। खाद्यान्न के अभाव में किसी भी स्कूल पर मध्याह्न भोजन बंद नहीं हो पाएगा। खाद्य एवं विपणन विभाग के डिप्टी आरएमओ रामानंद ने बताया कि एमडीएम का खाद्यान्न गोदाम पर मौजूद है। खाद्यान्न को कोटेदार को उठाना चाहिए। अगर कोई समस्या है तो कोटेदार उन्हें बताएं। जिला पूर्ति अधिकारी शशिकांत तिवारी का कहना है कि हर माह के 21 से 30 तारीख तक कोटेदार खाद्यान्न उठाते हैं। उसी समय खाद्यान्न दे देना चाहिए था। यह लापरवाही विपणन विभाग की है।