यज्ञ ब्रम्हा द्वारा पांच महायज्ञों की विस्तृत व्याख्या की गई
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आर्य समाज मगहर संत कबीर नगर के 67वें वार्षिकोत्सव का शुभारंभ के दूसरे दिन बृहस्पतिवार सुबह काल देव यज्ञ से हुआ। यज्ञ के ब्रम्हा अलीगढ़ के आचार्य ब्रजेश शर्मा जी द्वारा यज्ञ के उपरांत यज्ञ की महत्ता को बताते हुए पंच महायज्ञों की विस्तृत व्याख्या की गई।
उन्होंने कहा कि आज मनुष्य मात्र द्वारा पांच महायज्ञों को छोड़ने के कारण ही संसार में बिगाड़ आया है। ब्रम्हयज्ञ को छोड़ने से मनुष्य का ईश्वर से विश्वास उठ रहा है, देव यज्ञ को छोड़ने से प्रकृति में बिगाड़ हो रहा है।
नोएडा से आईं बहन अलका आर्या जी ने भजनोपदेश के द्वारा मनुष्य मात्र को जीवन के कल्याण के लिए दो सूत्रों की चर्चा करते हुए बताया गया कि मनुष्य को अपने जीवन के कल्याण के लिए ईश्वर और मृत्यु को नहीं भूलना चाहिए।
पंडित परमानंद प्रेमी जी ने भजन के द्वारा प्रभु भक्ति एवं जीवन जीने की कला बताई और कहा कि मनुष्य को अपने लिए ही नहीं औरों के लिए भी जीना चाहिए। सभा में देवव्रत आर्य, ओम प्रकाश आर्य, रामेश्वर आर्य, अशोक आर्य, विजय कुमार व नगर के अन्य गणमान्य लोग, महिलाएं और बच्चे उपस्थित रहें।