मनरेगा मजदूरों को तीन महीने से नहीं मिली मजदूरी
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अमर उजाला ब्यूरो
संतकबीरनगर। केंद्रीय बजट के अभाव में जिले के मनरेगा मजदूरों को तीन महीने से मजदूरी नहीं मिली है। मजदूरी मद में करीब सवा दो करोड़ रुपये की दरकार है, लेकिन अक्तूबर से अब तक एक भी रुपये नहीं मिला है। इसके चलते मनरेगा से होने वाले विकास कार्य भी ठप हैं।
जिले के नौ ब्लॉकों में कुल मिलाकर दो लाख 38 हजार 831 मजदूरों का जॉब कार्ड बना है। इनको वर्ष में 150 दिन रोजगार देने के लिए सरकार की तरफ से मनरेगा के तहत कार्य कराए जा रहे हैं, लेकिन अक्तूबर से अब तक जिले को बजट ही नहीं मिल पाया है। हैंसर ब्लॉक के गांव रामपुर निवासी रामधनी, नंदलाल, जगलाल आदि का कहना है कि पिछले छह महीने से उन लोगों को मजदूरी नहीं मिली है। दशहरा व दीपावली जैसे पर्व पर भी उधार लेकर काम चलाना पड़ा था। कैलाश, मुनक्का, सावित्री, कोमल, कन्हैया लाल, श्रीराम आदि मजदूरी नहीं मिलने के चलते परेशान हैं। ग्राम प्रधानों की दिक्कत यह है कि मजदूर काम के बदले रुपये की मांग के लिए बार-बार आते हैं, लेकिन ब्लॉक के अधिकारी बजट की कमी की बात बता रहे हैं। मजदूरों का रकम सीधे बैंक में जाता है जिसके लिए मजदूर बैंक का भी चक्कर लगा रहे हैं।
बजट के अभाव में कार्य प्रभावित
ग्राम प्रधानों का कहना है कि मनरेगा मद में सड़क पर मिट्टी भराई, पोखरे की खुदाई समेत कई अन्य कार्यों का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन बजट के अभाव में कार्य शुरू नहीं हो पाया है। वजह यह कि मजदूरों का पहले से ही काफी रकम बकाया है। जहां पक्का निर्माण कराया जाना है, उस मद में भी धन की जरूरत है। बजट नहीं मिलने से गांवों में विकास कार्य प्रभावित हो रहा है।
बजट की डिमांड भेजी गई है : सीडीओ
सीडीओ हाकिम सिंह का कहना है कि कई ग्राम प्रधानों ने बजट के अभाव में कार्य प्रभावित होने व मजदूरों के भुगतान में देरी की शिकायत की थी। इस विषय पर डीसी मनरेगा से जानकारी ली गई तो पता चला कि करीब सवा दो करोड़ रुपये की जरूरत है, लेकिन अक्तूबर से बजट नहीं मिलने के चलते दिक्कत आई है। शासन को डिमांड भेजी गई है। बजट मिलते ही भुगतान शुरू करा दिया जाएगा।