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मध्य दिसम्बर में भी सुन्न पड़ा है बखिरा पक्षी विहार

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दिसंबर की गर्मी ने रोका विदेशी मेहमानों का आगमन
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ठंड कम होने के चलते झील में जलकुंभी, नरकट, खर पतवार की अधिकता
भोजन की कमी से भी प्रभावित है मेहमान पक्षियों का आगमन
दिसम्बर की शुरुआत में आ जाते हैं करीब 10 हजार विदेशी मेहमान
अमर उजाला ब्यूरो
बखिरा। हर वर्ष नवम्बर से फरवरी के मध्य प्रवासी पक्षियों के कलरव से गूंजने वाला बखिरा ताल इस बार शांत है। मध्य दिसंबर तक ताल में मात्र सौ-सवा सौ साइबेरियन पक्षी ही मौजूद हैं। इसके चलते झील में सैर के लिए आने वाले पर्यटक भी निराश हैं। पक्षियों की कम संख्या के लिए मौसम को कसूरवार ठहराया जा रहा है। स्थानीय वन कर्मियों एवं पक्षियों के विषय में जानकारी रखने वालों का मानना है कि दिसम्बर की गर्मी इन विदेशी मेहमानों के लिए अनुकूल नहीं है। इसके अलावा झील में बढ़ते खर-पतवार भी इनकी अठखेलियों में बाधक बन रहे हैं।
बखिरा ताल 2894.21 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है। वर्ष 1990 में इसे राष्ट्रीय पक्षी विहार घोषित किया गया था। प्रति वर्ष जाड़े के दिनों में यहां बर्फीले क्षेत्रों से पक्षियां आती हैं। करीब चार महीना पूरा क्षेत्र इन विदेशी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार रहता है। झील के निर्मल जल पर इनकी अठखेलियां देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। किन्तु इस साल चिड़ियों की संख्या आर्श्चजनक रूप से बेहद कम है। इस पक्षी विहार के क्षेत्रीय वनाधिकारी सुरेश राम बताते हैं कि पिछले वर्ष तक दिसम्बर महीने में लगभग 10 हजार की संख्या में चिड़ियों की मौजूदगी होती थी। पूरा झील इन पक्षियों से भरा हुआ था, किन्तु इस साल महज 100 से डेढ़ सौ की संख्या में ही इनकी मौजूदगी चिंता का विषय है। वेणीमाधव इंटर कालेज बखिरा के अध्यापक व बखिरा ताल में आने वाले पक्षियों पर रिसर्च करने वाले डीपी सिंह ने बताया कि साइबेरिया में इस वक्त तापमान शून्य होने की वजह से पक्षियों के जीवन पर संकट आ जाता है। यहां आने वाले पक्षी 10 से 15 डिग्री तापमान के अनुकूल होते हैं। इसलिए यूपी के पूर्वांचल का मौसम उनके लिए सुहाना होता है। परंतु इस बार पूर्वांचल में दिसम्बर महीने में भी तापमान 20 डिग्री सेंटीग्रेड से ऊपर बना हुआ है। इसके चलते ही अभी विदेशी मेहमानों की संख्या कम दिख रही है।
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भोजन का भी बढ़ा संकट
झील में नाविक दिलीप तिवारी ने बताया कि नरकट, जलकुंभी व अन्य खर पतवार से झील का तीन चौथाई हिस्सा अभी ढका हुआ है। विदेशी पक्षियों का मुख्य भोजन शैवाल है। झील की तलहटी में मौजूद शैवाल व कवक के जलकुंभी से ढका होने की वजह से पक्षियों को भोजन नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से यहां आने वाले पक्षियों की संख्या में कमी आ रही है।
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इन विदेशी पक्षियों से गूंजता है ताल
झील में आने वाले प्रवासी पक्षी लालसर, डुबडूबी, सिलेटी अंजन, शिवहंस, गेाई लाल गोई, लाल अंजन, रंगीन जांघिल, काला जांघिल, मैना, सफेद बाजसवन, सुर्खाव, चील, बडा गरुण, नीलसर , सारस, ताल मखानी, टिटिहरी, हुदहुद, धनेश प्रमुख है।
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