40 हजार पक्षियों की आवक से बढ़ी बखिरा झील की रौनक
संवाद न्यूज एजेंसी
बखिरा। पिछले वर्षों की तुलना में इस साल प्रवासी पक्षियां अधिक संख्या में आई हैं। इसके साथ ही पक्षी विहार बखिरा का मुख्यालय संतकबीरनगर शिफ्ट होने के बाद से ही प्रशासनिक गतिविधियों में तेजी आई है। पहली बार बर्ड डे पर झील के किनारे हुए आयोजन से लोगों को झील के विकास की उम्मीद जगी है।
बखिरा में तैनात उप प्रभागीय वनाधिकारी रणविजय सिंह ने बताया कि 29 वर्ग किलोमीटर में फैले बखिरा झील में विगत सालों में प्रवासी पक्षियों की संख्या में काफी कमी आई थी। इस वर्ष करीब 40 हजार की संख्या में प्रवासी पक्षियों झील में आई हैं। 2018-19 में करीब बीस हजार प्रवासी पक्षियां आईं थी। वहीं 2012-13 में रिकॉर्ड टूट गया था और एक लाख से ऊपर पक्षियां आईं थी। वहीं झील में पक्षियों के शिकार की घटनाओं में कमी आई है। इस वर्ष शिकार का एक मामला सामने आया है। 2019-20 में कोई घटना नहीं हुई थी। 2018-19 में दो मामला सामने आया था।
झील के विकास की लोगों में जगी उम्मीद
मंगलवार को बर्ड डे दिवस पर हुए बृहद आयोजन को लेकर वन विभाग काफी सक्रिय था। जनपद के आला अधिकारियों, विधायक के साथ ही वन विभाग के उच्च अधिकारी भी बर्ड डे पर मौजूद थे। लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग ने किताबें व डायरी वितरित भी की। क्षेत्रीय निवासी रामनिधि तिवारी, कुंवरजीत सिंह, लालचंद निषाद ने कहा कि इस आयोजन से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रशासन अब पक्षी विहार को लेकर गंभीरता दिखाने लगा है।
विकास के लिए कार्ययोजना पर चल रहा काम: विधायक
मेंहदावल विधायक राकेश सिंह बघेल ने कहा कि बखिरा झील की पहचान पूर्व में मोती झील के रूप में थी। इसके विकास के लिए शासन व प्रशासन दोनों का फोकस है। इसके लिए सड़क निर्माण, जेटी, प्लेटफार्म, वाहनों की पार्किंग के लिए कार्य किया जा रहा है। झील की सफाई के लिए भी कार्य योजना बनाई जा रही है। बहुत जल्द ही बखिरा झील का विकास कार्य शुरू होगा। इसके लिए कार्ययोजना पर काम चल रहा है। पक्षी बिहार का विकास क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। पर्यटकों के लिए भी बखिरा झील को आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है।