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दो ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण में 40 लाख 92 हजार का घपला उजागर

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दो ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण में 40 लाख 92 हजार का घपला उजागर
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- मांझा खड़गपुर में 30 लाख 60 हजार और नरायनपुर में 10 लाख 32 हजार की मिली अनियमितता
- मांझा खड़गपुर में प्रधान- सचिव और नरायनपुर में पूर्व प्रधान, वर्तमान प्रधान और सचिव दोषी मिले
- डीएम की ओर से जांच में दोषी पाए गए लोगों को नोटिस जारी करके मांगा गया जवाब
शोभित कुमार पांडेय
संतकबीरनगर। विकासखंड पौली के मांझा खड़गपुर और नरायनपुर ग्राम पंचायतों में शौचालय निर्माण की हुई जांच में 40 लाख 92 हजार का घपला उजागर हुआ है। जांच में मांझा खड़गपुर में प्रधान और सचिव दोषी पाए गए हैं, जबकि नरायनपुर में पूर्व प्रधान, वर्तमान प्रधान और सचिव दोषी मिले हैं। डीएम ने 27 दिसंबर को दोषियों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं देने पर रिकवरी कराए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
सीडीओ बब्बन उपाध्याय ने बताया कि 26 नवंबर को डीपीआरओ की ओर से विकास खंड पौली के मांझा खड़गपुर ग्राम पंचायत में शौचालय निर्माण की जांच की गई थी। जांच में पाया गया कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत ग्राम पंचायत में 448 शौचालयों के लिए राशि आवंटित की गई थी। आवंटित शौचालयों के सापेक्ष 222 शौचालयों की राशि वर्तमान प्रधान और सचिव के जरिए आहरित की गई, जिसमें 89 शौचालय पूर्ण पाए गए। 21 अपूर्ण और 112 शौचालय ध्वस्त पाए गए। 226 शौचालयों की धनराशि लाभार्थियों के खाते में हस्तांरित की गई, जिसमें 87 शौचालय पूर्ण और 121 शौचालय अपूर्ण पाए गए। जबकि एक शौचालय का निर्माण प्रारंभ नहीं हुआ। 17 शौचालयों की राशि लाभार्थियों के खाते में अंतरित नहीं की जा सकी, जिससे स्पष्ट है कि शौचालयों की राशि लाभार्थियों को हस्तांरित करने के उपरांत प्रधान और सचिव की ओर से निर्माण कार्य में कोई रुचि नहीं ली जा रही है। प्रधान और सचिव के जरिए 255 शौचालयों की राशि 30 लाख 60 हजार रुपये का दुरुपयोग कर लिया गया है। प्रधान यशोदरा और सचिव को नोटिस जारी करके 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। संतोषजनक जवाब नहीं देने पर प्रधान और सचिव से रिकवरी कराए जाने के साथ ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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इसी तरह 26 नवंबर को ही डीपीआरओ ने उसी ब्लॉक के नरायनपुर ग्राम पंचायत में शौचालयों की जांच की थी। जांच में पाया गया कि 443 शौचालयों की राशि ग्राम पंचायत में आवंटित की गई थी। आवंटित शौचालयों के सापेक्ष पूर्व प्रधान एवं सचिव की ओर से 150 शौचालयों की राशि आहरित की गई, जिसमें 121 शौचालय पूर्ण कराए गए। 21 शौचालय अपूर्ण और आठ शौचालय ध्वस्त पाए गए। जांच में पाया गया कि वर्तमान प्रधान और एवं सचिव की ओर से 293 शौचालयों में से 270 शौचालयों की राशि आहरित कर 228 शौचालयों का निर्माण पूर्ण कराया गया। 18 अपूर्ण और 24 शौचालय ध्वस्त पाए गए, जबकि 23 शौचालयों की राशि लाभार्थियों के खाते में भेजी गई। इसमें आठ पूर्ण और चार अपूर्ण पाए गए। 11 शौचालयों का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं है। इससे स्पष्ट है कि शौचालयों की राशि लाभार्थियों के खाते में हस्तांरित करने के उपरांत दायित्वों के प्रति लापरवाही बरती जा रही है। पूर्व प्रधान और सचिव ने मिल कर 29 शौचालयों की धनराशि 3 लाख 48 हजार रुपये और वर्तमान प्रधान एवं सचिव के जरिए 57 शौचालयों की राशि 6 लाख 84 हजार रुपये का दुरुपयोग कर लिया गया है। जांच में दोषी पाए गए पूर्व प्रधान चंद्रभान और वर्तमान प्रधान पूजा के साथ ही सचिव को नोटिस जारी करके जवाब मांगा गया है। निर्धारित अवधि में जवाब नहीं देने पर रिकवरी कराए जाने के साथ दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
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