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अगर दूसरे ने कर दिया मतदान तो आपको मिलता है टेंडर वोट

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दूसरे ने कर दिया आपका मतदान तो डालें टेंडर वोट
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कई बार वास्तविक मतदाता की जगह दूसरा कोई कर देता है मतदान
पीठासीन अधिकारी के पास होता है टेंडर मत पत्र, अलग होती है गणना
उदयभान त्रिपाठी
संतकबीरनगर। चुनाव के दिन कई बूथों से यह खबर आती है कि मतदान करने पहुंचे व्यक्ति का वोट पहले ही किसी ने डाल दिया। ऐसी स्थिति में मायूस मतदाता लौट जाते हैं, लेकिन आयोग ने ऐसे मतदाताओं के लिए टेंडर वोट की व्यवस्था कर रखी है। मतदान कर्मियों को प्रशिक्षण के दौरान इसकी जानकारी दी जाती है और बूथ पर रवाना होने से पूर्व अन्य प्रपत्रों के साथ टेंडर मतपत्र और लिफाफे भी दिए जाते हैं। इसे मतगणना में पोस्टल बैलेट के साथ शामिल किया जाता है।
चुनाव चाहे लोकसभा का हो अथवा ग्राम पंचायत का, यह खबर हर बार सुर्खी बनती है कि बूथ पहुंचे तो पता चला कि उनका वोट पहले ही पड़ चुका है। ऐसे में कुछ मतदाता तो निराश होकर लौट जाते हैं, मगर कई मतदानकर्मियों, मतदान अभिकर्ता तथा राजनैतिक दलों के कार्यकर्ताओं से उलझ जाते हैं। इसके चलते कई बार मतदान तक प्रभावित होने लगता है। कार्मिक प्रभारी हाकिम सिंह के अनुसार अगर बूथ पर पहुंचे किसी मतदाता के नाम का वोट पड़ चुका है और वह मतदाता पहचान पत्र के जरिए खुद को वास्तविक मतदाता बता रहा है तो पीठासीन अधिकारी इसकी सतर्कतापूर्वक पुष्टि करेंगे। यह तय हो जाने पर कि बूथ पर मौजूद व्यक्ति वास्तविक मतदाता है और इसके नाम का वोट किसी अन्य ने डाल दिया है तो वह वास्तविक मतदाता को टेंडर मतपत्र देगा। इसके लिए जरूरी औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए टेंडर मतपत्र का लिफाफा अलग रखा जाएगा। मतदान समाप्त होने के बाद जब ईवीएम व वीवीपैट मशीन के साथ अन्य प्रपत्र जमा होंगे तो यह टेंडर मतपत्र भी जमा होगा। टेंडर मतपत्र को पोस्टल बैलेट के साथ ही गिना जाता है।
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कर्मचारियों को दिया जाता है प्रशिक्षण : सीडीओ
कार्मिक प्रभारी/सीडीओ हाकिम सिंह ने बताया कि टेंडर मतपत्र के विषय में मतदान कर्मियों को प्रशिक्षण के दौरान पूरी जानकारी दी जाती है। बूथ पर जाते वक्त मतदान कर्मियों को जो निर्वाचन सामग्री दी जाती है, उसमें टेंडर मतपत्र से संबंधित प्रपत्र भी होता है। लोगों को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए जिससे कि वे ऐसी परिस्थिति आने पर मायूस होने या विवाद करने के बजाय अपने अधिकार का उपयोग कर सकें।
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